Newsfellow.com News,Uncategorized ब्राह्मण परशुराम ने क्यूँ किया धरती को क्षत्रियों से वंचित और क्यूँ किया अपनी ही माँ का वध!!!/Why Parshurama killed his mother

ब्राह्मण परशुराम ने क्यूँ किया धरती को क्षत्रियों से वंचित और क्यूँ किया अपनी ही माँ का वध!!!/Why Parshurama killed his mother



Hello Fellows ,

आपको सभी को ध्यान में होगा कि अभी कुछ समय पहले भगवन परशुराम जयंती मनाई गयी लेकिन क्या हम जानतें हैं कि वे कौन थे और ब्राह्मण होते हुए उन्होंने क्यूँ धरती को क्षत्रियों से वंचित किया और अपनी माँ का वध करने के पीछे की क्या कहानी है? बड़े दिनों से उत्सुकता थी कि मैं भी भगवान परशुराम के बारे में थोडा ज्ञान एकत्रित करूँ और आपसे साँझा करूं। भगवान परशुराम अष्टचिरंजीवी में से एक हैं जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है।

हनुमान्‌ जनको व्यासो वसिष्ठश्च शुको बलिः
दधीचि विश्वकर्माणौ पृथु वाल्मीकि भार्गवः ॥१॥

भार्गवः “भृगुवंशी परशुराम”

भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया इनके happy birthday के रूप में मनाई जाती है कहीं-कहीं इसे “परशुराम द्वादशी” भी कहा जाता है लेकिन ज्यादातर इलाकों में परशुराम जयंती को “अक्षय तृतीया” के रूप में ही मनाया जाता है । “Facebook” आदि पर देखने को मिला की कुछ ब्राह्मण स्वयं को परशुराम के वंशज बताकर ज्यादा ही गर्व महसूस कर अपने copyright का ठप्पा लगा रहे थे, लेकिन आपको बता दें कि परशुराम जी भारद्वाज और कश्यप गोत्र के कुलगुरु भी माने जातें हैं । ध्यान देने योग्य बात यह है कि भगवान और महापुरुषों को जाति विशेष से जोड़कर हम लोग अपने ही धर्म का नास पीट रहें हैं ।भारतदेश में इन महापुरषों का जन्म हुआ और हम सब भारतवासी हैं केवल इसी बात को गर्व करने का विषय बनाना चाहिए।

हम सब जानते हैं कि श्रवण कुमार ने माता पिता की कितनी सेवा की लेकिन अगर माता पिता कि आज्ञा मानने में कोई श्रवण कुमार को टक्कर दे सकता है तो परशुराम जी ही हैं, जिन्होंने अपने पिता के कहने पर अपनी ही माँ की गर्दन को धड़ से अलग कर दिया था।

अब इसके पीछे की कहानी भी सुन लो भैया!!!

भगवान परशुराम के पिता जी का नाम ऋषि जमदग्नि (सप्तऋषि में से एक) और माता का नाम रेणुका था ये वही ऋषि जमदग्नि हैं जिनके पिता ऋचिका और दादा ऋषि भृगु और पडदादा ऋषि च्यावन थे तो हुआ यूँ कि परशुराम जी की माता जी को पिता जमदग्नि ने पूजा के लिए पानी हेतु घाट पर भेजा और रेणुका ने वहां जाकर देखा कि जल में देवता जल-विहार कर रहें है और वे उसे देखने में मग्न हो गयी जिसकी वजह से देर हो गयी और जमदग्नि द्वारा कारण पूछने पर चुप्पी साध गयी।

लेकिन अब जमदग्नि ठहरे त्रिकालदर्शी उन्होंने अपनी दिव्यदृष्टि से सब जान लिया गुस्से में तमतमाए पिता जी ने अपने पांचों पुत्रो (वासू, विस्वा-वासू, ब्रिहुध्यनु, ब्रित्कन्व,परशुराम) को लाइन से खड़ा किया और कहा कि अपनी माँ का सर धड़ से अलग से करदो जब चारों पुत्रों ने माता मोह में ऐसा नहीं किया तो उन्हें पत्थर होने का श्राप दे दिया। अब सबसे छोटे पिता के लाड़ले पुत्र ने फरसा उठाया और चला दिया अपनी ही माँ की गर्दन पर। पुत्र की पितृभक्ति देख जमदग्नि ने “एवमस्तु” बोला और कहा कि मांग लो जो मांगना है, तो परशुराम ने अपनी माता को पुनर्जीवित करने का और भाइयों को श्रापमुक्त करने का वर माँगा और जमदग्नि को ऐसा करना पड़ा। बाद में परशुराम ने अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिला के एक कुंड में स्नान कर अपने इस कृत्य का प्रायश्चित किया और इस कुंड को आज परशुराम कुंड के नाम से भी जाना जाता है।

क्यूँ किया धरती को क्षत्रियों से वंचित?

क्षत्रियों से 21 बार अगर मुक्त किया था तो अब भी क्षत्रिय क्यों हैं तो भैया जवाब सुन लो !! ये वो क्षत्रिय हैं जो किसी युद्ध में शामिल नहीं थे या छुप गये इधर उधर जाकर(मतलब कुछ भी!!!) ऐसा सलूक क्यूँ किया परशुराम ने क्षत्रियों के साथ? तो वजह यह है कि एक बार इनके पिता को राजा हैयहय ने गउएं दान में दी तो राजा के पुत्र कृतअर्जुन और कृतवीर्यअर्जुन दान में दी हुई गउएं वापिस मांगने लगे तब जमदग्नि ने गउएं वापिस करने से मना कर दिया  लेकिन बल प्रयोग द्वारा राजाओं ने गउएं छीन ली। पिता का अपमान परशुराम से सहन न हुआ और जाकर उन्होंने राजा का गला काट डाला । अब उन्हें लगा कि यह धरती क्षत्रियों के रहने लायक नहीं है, बस फिर क्या था कर दिया “क्षत्रिय सफाई अभियान” शुरू ।

अब आप सोच रहे होंगे कि 21 बार ही क्यों किया क्षत्रियों से खाली 22वीं बार शक्ति क्षीण हो गयी थी क्या? ऐसा नहीं है, इसका भी सुन लो, ध्यान साधना में बैठे हुए परशुराम जी को कुछ टूटने की आवाज़ आई । ये वही धनुष था जो राजा जनक को भगवान शिव को दिया था। गुस्से से भन्नाये तुरंत वहां पहुँच गये और राम लक्षमन से लगे बतियाने, लेकिन कुछ देर बाद बात करके समझ गये कि राम तो स्वयं विष्णु अवतार हैं और क्षत्रिय राजा के रूप में पृथ्वी पर आ गये हैं, अब कोई क्षत्रिय ऐसी हरकत नहीं करेगा जैसी उनके पिता के साथ की गयी थी। जब क्षत्रिय लोग पृथ्वी छोड़ कर भागने लगे इस तो इस चिंता के फलस्वरूप कश्यप मुनि ने चिंतित होकर परशुराम को पृथ्वी छोड़ने का आदेश दिया और उनकी आज्ञा का पालन करते हुए परशुराम महेंद्र्गिरी पर्वत पर रहने चले गये। यह उड़ीसा के गजपति जिले में स्थित है। और महेंद्र्गिरी पर्वत को भगवान परशुराम का निवासस्थान माना जाता है ।

मान्यताओं का बाज़ार:

मान्यता है कि क्षत्रियों के खून से सना फरसा परशुराम ने फेंका तो समुद्र ने उस फरसे को जगह देने के लिए अपना स्थान छोड़ दिया और वह जगह आज का केरल है । लेकिन केरल का मुख्य त्यौहार तो ओणम है, जो राजा बालि की याद में मनाया जाता है। और ऐसा माना जाता है कि राजा बालि हर साल ओणम पर वहां आते हैं। ये वो ही बालि हैं जिन्होंने अपना सब कुछ विष्णु के 5वें अवतार वामन भगवान के याचक रूप को दे दिया था। ध्यान दीजिये परशुराम विष्णु के छठे अवतार थे तो मतबल ये कि केरल तो वहां था पहले से:)  दूसरी मान्यता ये है कि परशुराम जी के जन्मदिन पर लोग व्रत कर निडर व पराक्रमी संतान होने की कामना करतें हैं। और ऐसा भी माना जाता है कि यदि कोई मनुष्य इस दिन व्रत कर परशुराम जी का ध्यान करे तो उसे अगले जन्म में राजा बनने का योग होता है।

आप सभी से निवेदन है कि अगर भगवान परशुराम से जुडी कोई और जानकारी आपके पास सुरक्षित है तो आप नीचे comment box में शेयर करें ताकि आपके माध्यम से और लोग भी इसका लाभ ले सकें।

1 thought on “ब्राह्मण परशुराम ने क्यूँ किया धरती को क्षत्रियों से वंचित और क्यूँ किया अपनी ही माँ का वध!!!/Why Parshurama killed his mother”

  1. sachin says:

    Very informative article. Bravo !!

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