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google+ का सूर्यास्त गूगल द्वारा ही किया जा रहा है लेकिन क्यों?

Why google is shutting down google+

Hello Fellows,

किसी कंपनी के बंद होने के पीछे बहुत से कारण हो सकतें हैं लेकिन google जैसी कंपनी अपने किसी प्रोडक्ट को बंद करे तो सवाल उठता है कि ऐसा भी क्या हुआ कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को बंद करने का निर्णय ले लिया गया। हालाँकि Google को पता है कि google+ को बंद करने से करोड़ों उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा। आईये जानतें हैं वे कारण जिसकी वजह से Alphabet Inc(Parent Company of Google) को ऐसा फैसला लेना पड़ा।

सबसे पहले जानतें हैं कि google+ को बनाया क्यों गया था?

आज से लगभग 10 साल पहले एक सोशल नेटवर्किंग साईट का बड़ा बोलबाला था जिसका नाम था “Orkut” अपने photos वीडियोज को शेयर करने के लिए पहले इसका इस्तेमाल करते थे और लोगों का ऑरकुट के प्रति इतना क्रेज था कि बहुत कम समय यह सोशल प्लेटफार्म पर अपनी जगह बनाने में सफल हो गयी। Orkut बनाने वाला भी Google का ही employee Orkut Büyükkökten  (Turkish) व्यक्ति था। उसने ऑरकुट को जुलाई 2004 में अपने independent प्रोजेक्ट के नाते बनाया गया था।

 

Orkut Logo

 

Orkut पर सबसे ज्यादा ट्रैफिक भारत और ब्राज़ील से ही आता था तो google ने फैसला लिया कि ऑरकुट का हेड ऑफिस ब्राज़ील के  Belo Horizonte में खोला जाये लेकिन 30 सितम्बर 2014 में गूगल ने पाया कि जुलाई 2014 से लोगों ने ऑरकुट पर कोई भी अकाउंट नहीं बनाया है और इसे बंद कर दिया।

इसका भी कारण यह रहा कि एक नयी सोशल नेटवर्किंग साईट “Facebook” ने अपने पैर जमा लिए थे और लोग इसके दीवाने हो चुके थे, सर्च करने के मामले में गूगल को कोई भी अब तक पछाड़ नहीं सका था, एक और विडियो शेयर करने की साईट थी youtube. जब गूगल को अपने से compete करता कोई भी दिखा उसे खरीद लिया गया।  9 अक्टूबर 2006 को गूगल ने youtube जैसे बड़ी कंपनी को $1.65 billion में खरीद लिया यह गूगल द्वारा किया गया दूसरा सबसे बड़ा अधिग्रहण था।

 

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मार्किट में एकाधिकार स्थापित करने की नीयत से google द्वारा यह कदम उठाया गया लेकिन आँख का रोड़ा तो फेसबुक था जो बिकने को तैयार न था अब उसे चुनौती कैसे दी जाये तो google+ को फेसबुक के प्रतिद्वन्दी के रूप में खड़ा किया गया।

लोगों को google+ से कोई ख़ास मज़ा नहीं आया तो गूगल ने hangouts को जोड़ा जिसे लोगों ने विडियो calling के लिए बहुत इस्तेमाल किया लेकिन फिर भी लोग सोशल नेटवर्किंग साईट फेसबुक के एडिक्शन से उभर नहीं पाए।

 

google+

 

Google+ को बंद करने की नौबत क्यों आन पड़ी?

अब यह जानना भी बड़ा दिलचस्प है कि google+ को बंद करने का निर्णय भी ले लिया गया, कहीं न कहीं इसका मतलब तो यही हुआ कि फेसबुक को मात देने में गूगल जैसी कंपनी ने भी घुटने टेक दिए:)

सबसे पहला कारण तो यह रहा कि google+ को केवल 10% लोग ही इस्तेमाल करतें हैं और कभी-कभार कोई पोस्ट डाल दिया करते थे  और इन 10% लोगों का भी एवरेज टाइम भी 5 सेकंड ही रहता था वहीँ 90% लोगों ने कभी google+ को देखा तक नहीं।

google की third party कंपनी है जो गूगल के प्रोडक्ट्स की समीक्षा करती है कि लोगों के लिए google कंपनी के प्रोडक्ट्स कितने उपयोगी हैं और इस कंपनी ने पाया है कि google अपने प्रभाव को google+ के माध्यम से अपने उपभोक्ताओं को satisfy करने में बहुत अधिक सफल नहीं हो पाया है।

एंड्राइड मार्किट प्लेस पर भी गूगल ने एप्स को सीमित करने के फैसला लिया है, हालाँकि यह चर्चा का विषय तो था ही कि एक गेमिंग एप या एक टार्च की एप को उपभोक्ता की कांटेक्ट डिटेल्स, फोटोज आदि का access क्यों चाहिए? इससे डाटा चोरी होने के खतरा बना रहता है। (और शायद अंदर की बात भी यही है!!)

इसीलिए गूगल ने काफी सारी apps से जुड़े डाटा शेयरिंग के मामले को users की इच्छा पर छोड़ दिया है। आने वाले समय में यह उपभोक्ता को निर्णय करना है कि उसे किस app के साथ अपनी डिटेल्स शेयर करने की इज़ाज़त देनी है।

 

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Google के एक प्रोजेक्ट “स्ट्रोब” ने माना है कि एक प्रकार की Bug से लगभग 5 लाख यूज़र्स का डाटा प्रभावित हुआ है जिसका उल्लेख “वाल स्ट्रीट जनरल” के हवाले से भी किया गया है। Google+ को पूरी तरह से बंद करने से पहले यूज़र्स को अपने डाटा को save करने के लिए 10 महीने का समय भी दिया गया है।

फेसबुक और google+ से जुड़े डेटा लीक के और भी कई मामले सामने आयें हैं  जिससे कि इन बड़ी कंपनियों के यूज़र्स का डेटा external developers के हाथ लगने के chances बने हुए हैं। इसलिए फेसबुक, google जैसे बड़ी कंपनियों को चाहिए कि आँख मूंदकर इन developers पर भरोसा न करें जो एंड्राइड play store पर अपनी apps को submit करने में सफल हो जातें हैं।

शायद इसीलिए iOS पर लोग ज्यादा भरोसा करतें हैं जहाँ डेटा लीक से संबंधित खबरें बहुत ही कम हैं:)

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