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अदभुद और अदम्य साहस की कहानी:अरुणिमा सिन्हा/Unbelievable story of Success: Arunima Sinha

Hello Fellows,

अंगारों पर चलने वाली नागालैंड की एक महिला अंगारों पर इसलिए चल सकती है क्यूंकि उसके मन में एक विश्वास है कि ऐसा करने से भगवान प्रसन्न होंगे और उसकी मनोकामना की पूर्ति होगी, थाईलैंड के एक समुदाय के लोग परम्परा के अंतर्गत अपने शरीर को जगह जगह से सुइयों से इसलिए विच्छेदित कर देतें हैं क्योंकि उन्हें अपने भगवान पर विश्वास है और इस बात का आभास है कि स्वयं को प्रताड़ित करने से भी अगर ईश्वर प्रसन्न होंगे तो हमें ऐसी प्रताड़ना भी मंजूर है।

दोस्तों!! आपको बता दें की सारा खेल आस्था (Belief System) का है आस्था भगवान पर हो या स्वयं पर कमाल के काम करवा सकती है 🙂

चाहे वो लोकमान्य तिलक हों या वीर सावरकर इतने बरस जेल में रहने के बाद भी और अनेकोंअनेक दुःख सहने के बाद भी इतिहास में अपना नाम अमर करके दुनियां से विदा हो गये। यह सब सम्भव हो सका क्योंकि उन लोगों का स्वयं पर इतना विश्वास था कि हम जो भी काम कर रहें हैं वह देश के पक्ष में है और ईश्वर के अनुरूप है। यह उनके Belief System का कमाल ही था जिस से वे अपना नाम अतीत के पन्नों में दर्ज करवा पाए।

आप ऊँट को ही देख लीजिये, रेगिस्तान में रेतीली जगह पर खूंटा नहीं गाड़ा जा सकता लेकिन अगर उसकी रस्सी को लेकर इस तरह का ड्रामा कर दिया जाये कि आप उसकी रस्सी को बांध खूंटे से बांध रहें हैं तो ऊँट सारी रात यही सोचता है मैं रस्सी से बंधा हुआ हूँ और तब तक खड़ा नहीं होता जब तक उसका मालिक आकर रस्सी खोलने का ड्रामा न दोहराए ये ऊँट का Belief System है।

यही बात आपको एक व्यक्ति का उदाहरण देकर बताना चाहूँगा कि किस तरह से कोई अपनी कमजोरियों पर कैसे विजय पा सकता है। एक लड़की थी और उसका नाम था अरुणिमा सिन्हा। यू. पी. के एक छोटे से गाँव की रहने वाली लड़की एक ट्रेन में सफ़र कर रही थी और कुछ गुंडों ने लूटपाट के इरादे से उसकी चेन खींचने के लिए उसे ट्रेन की पटरी पर फेंक दिया और ट्रेन उसकी टांगो के ऊपर से निकल गयी। बेसुध अरुणिमा सारी रात वहीँ पड़ी रही और उसके मांस को कीड़े खाते रहे। सुबह उसे खोजते-2 पुलिस आई और उसे दिल्ली हॉस्पिटल दाखिल करवाया गया, डॉक्टर्स ने पाया कि उसकी एक टांग कट चुकी है और कमर में multiple fractures हैं इस कारण वह उम्रभर चल फिर नहीं पायेगी।   

 “You can become Strongly Mental or you can become Mentally Strong”

डॉक्टर्स ने बताया कि उसे चलने के लिए Artificial legs का सहारा लेना पड़ेगा, लेकिन अरुणिमा के मन में कुछ और ही चल रहा था वह सोच रही थी कि हे! ईश्वर मैं मर भी सकती थी लेकिन अगर तूने मुझे बचाया है तो जरूर ही मुझसे कोई महान काम करवाना होगा। अरुणिमा का Belief System चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था कि डॉक्टर्स ये कैसे कह सकतें हैं कि मैं चल फिर नहीं पाऊँगी बल्कि मैं इन्हें माउंट एवेरेस्ट पर भी चढ़कर दिखा सकती हूँ। इसी विश्वास के चलते अरुणिमा “बछेन्द्री पाल” से मिली और एवेरेस्ट चढ़ने की इच्छा जताई।  बछेन्द्री जी ने उसके ज़ज्बे को सलाम करते हुए कहा कि तुमने ऐसी हालत में एवेरेस्ट चढ़ने का फ़ैसला कर लिया “तुम तो एवेरेस्ट चढ़ गयी समझो अब तो दुनियां को तारीख़ का पता लगना बाकी है”  

“You can have a Hopeless End or you can have an Endless Hope

इसी “Belief System” के चलते अरुणिमा ने माउंट एवेरेस्ट की चढ़ाई को पूरा ही नहीं किया बल्कि दुनियां की 7 highest peaks पर चढ़कर भारत का तिरंगा फहराया और आज भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में अरुणिमा के इस अदम्य साहस के चलते उन्हें “पद्मश्री” के सम्मान से सम्मानित किया गया है। 

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4 thoughts on “अदभुद और अदम्य साहस की कहानी:अरुणिमा सिन्हा/Unbelievable story of Success: Arunima Sinha

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