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पार्ट-टाइम जॉब कर “King Kesariya” को बनाया ब्रांड : 30 लाख है सालाना कमाई

king kesariya owner

Hello Fellows,

आज जिस शख्सियत से हम आपको रूबरू करवाने जा रहें हैं उसने न केवल अपने जीवन में असफलताएं देखी बल्कि उन असफलताओं को अपनी सफलता की सीढ़ी बनाकर मुकाम हासिल किया और न जाने कितने युवाओं का मार्ग भी प्रशस्त किया। यदि इन्सान केवल अपने लिए ही सोचे तो स्वार्थी कहलाता है लेकिन अंबाला के बेटे सचिन देव वशिष्ठ के अनुसार हमें अपने बढ़ने के साथ साथ समाज के वंचित वर्ग को उपर उठाना भी हमारी ही जिम्मेवारी है।

तो आईये जानते हैं कि कैसे पार्ट-टाइम जॉब कर “King Kesariya” को बनाया ब्रांड।

Newsfellow.com  को दिए गये एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि उनके पिता “श्री देवदत्त वशिष्ठ” जो कि आर्मी से रिटायर्ड हैं, की वजह से  बचपन से ही घर में अनुशासित माहौल रहा जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा इसलिए किसी भी काम को शिद्दत से करने की आदत उनका स्वभाव बन गया।

King kesariya owner

कैसे आया विचार?  

सचिन आजकल दिल्ली में रहतें हैं और उनके सबसे बड़े भैया सुनील एक समाजसेवी संस्था के अंतर्गत कश्मीर में 2006-2011 तक रहे, दोनों भाई आपस में जम्मू -कश्मीर के विषय में खूब बात किया करते थे। कश्मीर में उन्होंने कई युवाओं को काम करने के लिए प्रेरित भी किया और दिल्ली सम्बन्धी किसी की कोई आवश्यकता जैसे किसी कश्मीरी परिवार  दिल्ली के हॉस्पिटल्स में खून की ज़रूरत या कहीं से कश्मीर के किसान की पेमेंट के लिए वो सचिन को कह दिया करते थे।

पहाड़ का आदमी जल्दी से समतल क्षेत्रों की तरफ नहीं आना चाहता है।  आतंकवाद के विरुद्ध पारम्परिक ढंग से केसर और अन्य ड्राई फ्रूट्स की खेती करने वाले किसानों की उसके असली खरीदार से बनी दूरी को देखते हुए सचिन के मन में विचार आया कि अब कुछ ऐसा काम किया जाए जिससे जम्मू कश्मीर का असली केसर जोकि वहीं के कुछ दलालों के जरिये सस्ते दामों में खरीद  कर सऊदी अरब में ऊँचे दामों पर बेच दिया जाता है और जिसका प्रमाणिक ग्राहक भारत में उपलब्द्ध होने के बावजूद किसान को उसका असली मूल्य नहीं मिल पाता है।

कैसे बनाई पहुँच? 

 तब अपने सर्किल में बात करने पर उनके आत्मीय मित्र दीपक सोमवंशी जो कि खुद एक Entrepreneur हैं ने www.kingkesariya.co.in और www.kingkesariya.com बनाने में उनकी मदद की और सचिन को दुनियां में केसर की डिमांड से अवगत करवाया।  इन सब अध्ययनों से सचिन ने पाया कि भारत के जम्मू कश्मीर का केसर दुनिया में हाई डिमांड प्रोडक्ट है।  पहले इसकी सप्लाई केवल फ़ूड चेन्स को करनी शुरू की गई।  इसके बाद इन्टरनेट के जरिये उन्हें मेट्रिनिटी उद्देश्य के लिए असली और आर्गेनिक केसर की डिमांड आनी शुरू हो गई।

यह भी पढें: कैसे करें असली केसर की पहचान?

किंग केसरिया

कैसे किया विस्तार?

काम के विस्तार के लिए पूंजी की आवश्यकता थी. सचिन ने एक संस्था में पार्ट टाइम जॉब की और कुछ पूंजी जुटा कर पैकजिंग की R&D कर दुनियां की सबसे महंगी बूटी केसर को कैसे लम्बे समय तक सुरक्षित रखा जाए के आधार पर 1-2-4-10 ग्राम की अलग अलग पैकजिंग तैयार की और आज पूरे देश में शुद्ध केसर पहुँचाने का दावा करते हैं।

बोलता है नाम:

2017 में Global Insight Research की छपी एक रिपोर्ट में King Kesariya को दुनियां के 10 सबसे बेहतरीन केसर ब्रांड्स में शामिल किया गया. आज किंग केसरिया शुद्ध केसर और अपने गजब कश्मीरी कहवा के लिए लोगों में बहुत लोकप्रिय हो रहा है।

इसके अलावा Radiant insight ने Prominent Vendors की लिस्ट में भी किंग  केसरिया को शामिल किया है। सचिन आजतक और मनी भास्कर जैसी प्रख्यात न्यूज़ में जगह पा चुकें हैं।

किंग केसरिया

किंग केसरिया

क्या क्या आयीं मुश्किलें?

अपने इंटरव्यू में सचिन बतातें हैं कि शुरूआती दौर में उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, कच्चा सामान  और packaging की समस्या के चलते उन्हें नुक्सान भी हुआ लेकिन अपने product पर विश्वास और किसानों के भविष्य की चिंता उन्हें पथ से विचलित ना कर पाई, आगे वे बतातें हैं कि स्वयं ही थैला टांगकर दिल्ली मेट्रो से Noida और दिल्ली में बहुत से डीलर्स से उन्होंने संपर्क साधा और निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप King Kesariya को एक सफल ब्रांड के रूप में स्थापित किया। 1 gm के पैकेट से शुरू हुआ ये कारोबार आज 30 लाख के टर्न ओवर तक पहुँच चुका है और बढ़ रहा है।

आज किंग केसरिया के ग्राहक भारत के अलावा थाईलैंड, हांगकांग, श्रीलंका, सऊदी अरब, न्यूयॉर्क, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका (कोलोराडो) में हैं, सचिन का कहना है कि आने वाले कुछ समय में हम किंग केसरिया के उत्पादों को पूरे विश्व में ऑनलाइन उपलब्ध करवाएंगे और यदि ईश्वर ने चाहा तो किंग केसरिया अपनी शुद्धता के चलते विश्व का नंबर -1 ब्रांड बनकर जल्द ही आप सबके सामने होगा।

1 gm पैकेट

कैसे करतें हैं Manage? 

वेबसाइट पर क्या डालना है और उसे मैनेज कैसे करना है इसकी चिंता वे खुद ही करतें हैं, इसके अलावा किसी नये प्रोडक्ट को लांच करने में वे अपने शुभचिंतकों से काफी सलाह मशवरा करतें हैं, logistic से लेकर import export की देखरेख भी सचिन स्वयं करतें हैं लेकिन जब हमने उनसे पूछा कि आप में इतनी हिम्मत आती कहाँ से है?  तो उन्होंने बताया कि ध्यान व योग हमेशा से ही उनके साथी रहें हैं और जब भी समय मिलता है वे ऋषिकेश जाना पसंद करतें हैं, सचिन का कहना है कि प्रकृति में मनुष्य के सभी प्रश्नों का उत्तर छिपा है और मूल रूप से यही उनकी सफलता का कारण है।

दोस्तों! प्रबल इच्छाशक्ति और अनवरत प्रयासों से ही सफलता को पाया जा सकता है ऐसा एक उत्कृष्ट उदाहरण सचिन ने युवा वर्ग के सामने रखा है हम भी उनसे प्रेरणा लें और अपने देश के प्रति श्रद्धा रखते हुए अपने साथ साथ अपनों को भी आगे बढ़ाएं ऐसी कामना है

दोस्तों! आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट के माध्यम से या hellonewsfellow@gmail.com पर ईमेल करके अवश्य बताएं।

 

 

2 thoughts on “पार्ट-टाइम जॉब कर “King Kesariya” को बनाया ब्रांड : 30 लाख है सालाना कमाई

  1. सुनहरे भविष्य के प्रगतिपथ पर गतिमान हेतु, हृदय से शुभकानाएं

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