रक्षा बंधन की कहानी जानतें हैं क्या आप? Story of Raksha Bandhan

दोस्तों!! दुनियां में अगर सबसे पवित्र रिश्तों का नाम लिया जाये तो भाई बहन का रिश्ता उनमे एक विशेष स्थान रखता है। श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाये जाने वाले इस त्यौहार के पीछे क्या क्या कहानियां जुड़ी हैं आईये इस पोस्ट के माध्यम से जानने की कोशिश करतें हैं।

सबसे ज्यादा बताई जाने वाली कहानी: आपने अपने स्कूल में या कहीं न कहीं इस कहानी को जरूर सुना या पढ़ा होगा दरअसल बात मध्यकालीन युग की है और उस समय राजपूतों और मुसलमानों के बीच युद्ध चलता रहता था। रानी कर्णावती जो कि चित्तौड़ के राजा की विधवा थी और अपने पति की अनुपस्थिति में रानी अपने राज्य की रक्षा कैसे करे, यह एक बड़ा चिंता का विषय था। गुजरात के सुल्तान बहादुरशाह से अपने राज्य की प्रजा को बचाने के लिए रानी कर्णावती ने एक रक्षासूत्र(राखी) हुमायूँ को भेजकर मदद मांगी। परिणामस्वरूप हुमायूँ ने आक्रमणकारियों से चित्तौड़ की रक्षा कर अपने भाई होने का फर्ज़ निभाया। 

भगवान विष्णु से जुड़ी कहानी: राजा बलि ने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य स्थापित करने के लिए हवन यज्ञ का आयोजन किया और उनके यज्ञ सफल होते देख देवताओं को चिंता हुई जिसके कारण सभी देवता भगवान विष्णु के पास राजा बलि के यज्ञ को रोकने का प्रस्ताव लेकर गये। परिणामस्वरुप भगवान विष्णु ने “वामन अवतार” लिया और दानवीर राजा बलि के पास 3 पग भूमि का निवेदन लेकर गये। असुरों के गुरु शुक्राचार्य विष्णु भगवान के वामन अवतार को पहचान चुके थे और राजा बलि को ऐसा करने से मना करने लगे लेकिन राजा बलि भगवान विष्णु के छोटे से रूप को देखकर और मन में यह सोचकर कि अपने तीन पग में कितनी ही भूमि यह ब्राह्मण ले लेंगे, ऐसा सोचकर संकल्प कर चुके थे। तत्पश्चात वामन भगवान ने अपने आकार बढ़ाया और पहले पग में देवलोक दुसरे पग में पृथ्वी लोक को नाप लिया और पूछने पर कि हे राजन! अब तीसरा पग कहाँ रखूं? तो बलि ने अपना शीश आगे कर दिया और हमेशा के लिए पाताल लोक के स्वामी बन गये। यहाँ तक की कहानी तो हम सब जानतें हैं लेकिन इसके बाद क्या हुआ, आईये जानतें हैं….. भगवान विष्णु राजा बलि की इस दानवीरता से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें वर मांगने को कहा। राजा बलि ने उन्हें हमेशा अपने समक्ष रहने का वर माँगा और भगवान  विष्णु को पाताललोक में द्वारपाल बनना पड़ा। माता लक्ष्मी विष्णु लोक में अकेली होने के कारण परेशान रहने लगी तो नारदमुनि के सुझाव देने पर माता लक्ष्मी राजा बलि को राखी बांधने गयी और उपहार स्वरूप अपने पति को मुक्त करवा कर ले आई पुराणों के अनुसार वह दिन श्रावन मास की पूर्णिमा का दिन था और तब से रक्षा बंधन प्रचलन में आया 🙂 

शिशुपाल वध से जुडी कहानी: शिशुपाल का वध करने के बाद सुदर्शन चक्र जब वापिस भगवान की ऊँगली पर आया तो श्रीकृष्ण की ऊँगली पर हल्का घाव के कारण और रक्त बहने लगा और द्रौपदी ने तुरंत अपना दुपट्टा फाड़कर भगवान की ऊँगली पर बाँध दिया इसी बीच भगवान ने भावुक होकर द्रौपदी को वचन दिया कि जरूरत पड़ने पर वे अपनी बहन की रक्षा करेंगे। परिणाम स्वरुप जब भरी सभा में दुशासन ने द्रौपदी का चीरहरण किया तो भगवान ने स्वयं प्रकट हो एवं साड़ी बढ़ाकर लाज बचाई।  

भविष्यपुराण से जुड़ी कथा: परंपरागत मान्यता के अनुसार रक्षाबंधन का संबंध एक पौराणिक कथा से माना जाता है, जो कृष्ण व युधिष्ठिर के संवाद के रूप में भविष्योत्तर पुराण में वर्णित बताई जाती है। इसमें राक्षसों से इंद्रलोक को बचाने के लिए गुरु बृहस्पति ने इंद्राणी को एक उपाय बतलाया था जिसमें श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को इंद्राणी ने इंद्र के तिलक लगाकर उसके रक्षासूत्र बांधा था जिससे इंद्र विजयी हुए। वर्तमानकाल में परिवार में किसी या सभी पूज्य और आदरणीय लोगों को रक्षासूत्र बाँधने की परंपरा भी है। वृक्षों की रक्षा के लिए वृक्षों को रक्षासूत्र तथा परिवार की रक्षा के लिए माँ को रक्षासूत्र बाँधने के दृष्टांत भी मिलते हैं।

मंत्र जो राखी या रक्षासूत्र बंधते समय बोलना चाहिए: 

“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।”

आजकल बहुत से लोग रक्षा बंधन के दिन अनेक प्रकार के शकुन अपशकुन की बातें करतें हैं लेकिन दोस्तों!! मुझे लगता है कि एक बहन की दुआओं में इतनी शक्ति होती है कि हर प्रकार का क्लेश और बाधा दूर हो सकती है और जरूरी नहीं है कि बहन और भाई ही इस त्यौहार में शामिल हों आप किसी से भी रक्षा सूत्र बंधवाकर कर अपनी रक्षा का वचन ले सकतें हैं 🙂

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