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आखिर क्यों करतें हैं गणेश विसर्जन : Story behind Ganesh Visarjan

Ganesh Visarjan

Hello Fellows,

हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस शरीर की उत्पत्ति मिट्टी से हुई है और इस शरीर ने अंततोगत्वा मिट्टी में ही मिल जाना है हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद मनुष्य का दाह संस्कार करने की प्रथा है और चार दिन बाद उसके शरीर से बनी राख़ को गंगा जी या किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है इसी क्रम में आइये जानतें हैं कि गणेश जी की उत्पत्ति और गणेश विसर्जन से जुड़ी कथा।

कैसे हुई गणेश जी की उत्पत्ति:

एक बार मां पार्वती ने हल्दी और चंदन का उबटन लगाया हुआ था और उनकी स्नान करने की इच्छा हुई उन्होंने पाया कि सभी रक्षक भगवान शिव के साथ बाहर गए हैं।

माता पार्वती को चिंता हुई कि अब द्वार पर कौन रहेगा अपने शरीर से उतरे हल्दी और चंदन के उबटन से उन्होंने एक प्रतिमा का निर्माण किया और अपनी शक्तियों से उस प्रतिमा में प्राणों का संचार किया। इस प्रकार उनकी माता जब स्नान करने के लिए गए तो गणेश जी द्वार पर एक रक्षक के नाते खड़े हो गए कुछ समय के बाद जब भगवान शंकर अपने शिवगणों के साथ घर आए तो उन्होंने पाया कि कोई अनजान व्यक्ति द्वार पर खड़ा है।

इसके बाद कि हम कहानी सभी जानते हैं कि किस प्रकार से गणेश जी और भगवान शिव में युद्ध हुआ और भगवान शिव ने गणेश जी के सिर को धड़ से अलग कर दिया सच्चाई जानने के बाद भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर भेजा और कहा कि सबसे पहले जिस प्राणी का सिर मिले उस प्राणी का सिर लेकर आओ। अंत में एक हाथी का सिर गणेश जी के सिर पर लगा दिया गया और गणेश जी पुनर्जीवित हो गए।

मां पार्वती को चिंता हुई कि इस प्रकार के शरीर के साथ दुनियां भर में मेरे बालक का मजाक उड़ेगा। लेकिन ब्रह्मा जी ने यह कहा कि जो भी होता है सृष्टि के कल्याण के लिए होता है और भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि किसी भी कार्य का शुभारंभ करने के लिए गणेश जी की पूजा की जाएगी और इसे गजानन के नाम से जाना जाएगा।

Ganesh Visarjan/गणेश विसर्जन कब से मनाया जाता है:

गणेश उत्सव मनाना और गणेश विसर्जन करने का त्यौहार कोई बहुत ज्यादा पुराना नहीं है। यह केवल 100 वर्ष पुरानी बात है लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक जी द्वारा इसे गणेशोत्सव के रूप में मानना शुरू किया गया। शुरुआत में इसका उद्देश्य अंग्रेजो के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना था। महाराष्ट्र से शुरू हुआ यह त्यौहार धीरे-धीरे पूरे देश भर में मनाया जाने लगा।

गणेश विसर्जन से जुड़ी मान्यता:

धर्म शास्त्रों के अनुसार मह्रिषी वेद व्यास जी ने गणेश चतुर्थी से महाभारत की कथा भगवान गणेश को सुनानी शुरू की और पूरे 10 दिन तक यह कथा श्री गणेश जी को सुनाई जिसे गणेश जी ने अक्षर अक्षर जोड़ कर पूरी कथा को वैसा ही लिखा जैसा कि श्री वेदव्यास जी द्वारा बताया गया था।

10 दिन कथा सुनाने के पश्चात जब वेदव्यास जी की आंखें खुली तो उन्होंने पाया की अत्यधिक मेहनत करने के पश्चात श्री गणेश जी के शरीर का तापमान बहुत बढ़ गया है। तुरंत वेदव्यास जी ने गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर उन्हें स्नान करवाया।

ठंडे पानी से स्नान करवाकर उनके शरीर के तापमान को कम किया गया अर्थात चतुर्थी के 10 दिन पश्चात चतुर्दशी को उनको शीतल किया गया था।

ऐसी ही एक और कथा में यह भी वर्णित है कि शरीर का तापमान ना बढ़े इसलिए भगवान गणेश के शरीर पर सुगंधित मिट्टी का लेप किया गया जिसके कारण से उनके शरीर में अकड़न आ गई और माटी झड़ने भी लगी। तब उन्हें चतुर्दशी के दिन पानी में स्नान करने के लिए उतारा गया। इन 10 दिनों के दौरान श्री गणेश जी को उनके मनपसंद भोज्य पदार्थों को अर्पित किया जाता है और तत्पश्चात चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन किया जाता है।

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गणपति बप्पा मोरया का क्या अर्थ है?

बहुत स्थानों पर हमने सुना है कि गणपति बप्पा मोरया के नाम का जयकारा लगाया जाता है गणेश पुराण के अनुसार सिंधु नाम का एक दानव था जिसने देवताओं को परेशान किया हुआ था। इस दानव के अत्याचार से बचने के लिए सभी देवताओं ने भगवान गणपति का आह्वान किया।

राक्षस का संहार करने के लिए गणेश जी ने मयूर वाहन चुना 6 भुजाओं वाले भगवान गणेश के अवतार ने सिंधु नामक राक्षस का संहार किया। क्योंकि भगवान गणेश मयूर पर आए थे तो इस अवतार को मयूरेश्वर के नाम से जाना गया। मयूरेश्वर स्वरूप अवतार की भक्ति को भक्त गणपति बप्पा मोरया के जयकारों के साथ करते हैं।

क्या सुधार करने होंगे?

किसी भी त्यौहार को जब अधिकता में मनाया जाने लगता हैं तो उसमें समय के साथ कुछ त्रुटियां भी आ जाती हैं। बहुत से लोग जो इसे मनाते हैं उनके द्वारा गणेश जी की प्रतिमा को नदियों, समुद्रों, नहरों में प्रवाहित कर दिया जाता है। जिस से जल जीवन की आहार श्रृंखला प्रभावित होती है और जल प्रदूषण का कारण भी बनती है।

हिंदू धर्म में समय-समय पर त्योहारों को मनाने के तरीकों में पर्यावरण को बचाने के उद्देश्य से अनेकों अनेक सुधार किए गए हैं। हमें भी भगवान श्री गणेश के स्वरूप को ऐसी सामग्री से बनाना चाहिए कि विसर्जन के समय जल में उपस्थित मछलियों और अन्य जीवों का वे भोजन बन सकें और गणेश जी का विसर्जन जल प्रदूषण का कारण ना बने और साथ ही भूखे जीवों का पेट भर कर हम पुण्य के भागी बन सकें।

क्या हैं उदाहरण:

इन्टरनेट पर यह देखने में आया कि बहुत से स्थानों पर चॉकलेट स्वरुप गणेश जी को विराजित किया गया है जिसे आज के दिन दूध में प्रवाहित किया जायेगा और बाद में उसी प्रसाद को भक्तों में बाँट दिया जायेगा।

आप सभी को गणेश विसर्जन की हार्दिक शुभकामनाएं

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