दिल में बसा ऋषिकेश/Rishikesh

काफी समय के बाद ऋषिकेश जाने का मौका मिला, अपने मित्र सचिन और अनुभव का साथ पाकर रोमांच की चरम सीमा को छूने का प्रयास भी किया। बढ़ी कठिनाइयों के बाद दिल्ली के सराये रोहिल्ला Station से मसूरी express पकड़ी। कठिनाई ये आई कि हमारे मित्र सचिन जिन्होंने सुबह से कुछ खाया नहीं था उनके लिए Wah ji Wah से मलाई चाप जो लेनी थी 🙂 भैया! बड़ी मुश्किल से रिक्शा वाले की ऊल-जलूल बातें सुन के बाद हम स्टेशन पैदल पहुंचे अब आप सोच रहें होंगे कि पैदल क्यों ? जनाब दिल्ली का ट्रैफिक ही इतना जानलेवा था अब भाग भाग कर Train पकड़ी और राहत की सांस ली। अनुभव और मैं दोनों इस भागादौड़ी से हुई थकान का जिम्मेवार सचिन को ही मान रहे थे फिर क्या होना था 2-4 मिनट की गुदगुदाती बहस के बाद मैंने बोला की यार अब खोलो चाप का डिब्बा भूख लगी है, ये देख कर आस पास के लोग हंसने लगे हमारी मस्ती पर:) उम्म्म-उम्म्म चटकारे मार कर खायी गयी चाप का जो मजा हमने लिया वो शायद ही किसी ने इसी धरती पर लिया होगा:) गुस्सा इस बात पर आया दो प्लेट चाप ही क्यों ली गयी, खाना पैक क्यों नहीं करवाया क्यूंकि अंकुश wait कर रहा था कि ये तो अभी Starter है इसके बाद खाना तो खुलेगा ही। इसी दौरान मेरा पेट गरम-गरम नान, पनीर, दाल मक्खनी या मशरूम को सोचकर और भूखा महसूस करने लगा। खाने की non availability को लेकर गुस्से से लाल हुए मेरे चेहरे को देखकर दोनों समझ गये कि भाई भूखा है, ये जानते हुए भी कि butter naan, and छोले भटूरे मेरी कमजोरी हैं, वो तो खरीदे नहीं गये उपर से पूछ्तें हैं कि ये ले पानी पी ले, क्या करता कोई option नहीं था तो 2-4 पंजाबी की मीठी गोलियां सुनाकर भी पीना तो पानी ही पड़ा:) ये दोस्त हमेशा से ही कमीने रहें हैं चाहे आपके हों या मेरे (देखा आपको भी अपने ऐसे ही दोस्त की याद आई ना?) अनुभव, जो की एक ट्रेवल related job करता है उसे खाने के बाद चलती train में नींद आ गयी मेरे लिए ये थोड़ा मुश्किल था , क्यूंकि मेरे लिए ये first experience था।  मेरा साथ देने के लिए सचिन और मैं घंटो बैठे बतियाते रहे कौन कैसे लेटा है, कैसे सोया है, उसकी भाभी इसकी girlfriend आदि-आदि  टाइप की बातें करने के बाद सोचा कि दरवाजे के पास चलतें हैं। क्यूंकि हमें गाने का शौक भी है और चलती train में दरवाजे के पास गाना किसी को Disturb नहीं करेगा (social Responsibility you know:) ) हमनें खूब गाने गाये, अलग-अलग songs की tune के साथ experiments किये।

लेकिन, काफी देर के बाद खड़े खड़े थक गये 2:30 बज चुके थे और हम चल दिए अपने अपने बिस्तरों की तरफ सुबह 5:45 के आस-पास आँख खुली और fresh-vresh  होकर train से उतरे और चल दिए “हर की पौड़ी” की तरफ। सुबह-सुबह का अद्भुत नजारा पाकर मन को ऐसा लगा धन्य हो गया मैं आज, आपको ध्यान हो कि कई बार ऐसा होता है कि सूर्योदय लेट होता है और इसी दौरान आई धूप ज्यादा गरम नहीं होती (वैसा दिन था ये)।

हमने अपने जूते चप्पल जमा करवाए और जल्दी जल्दी में चल दिए गंगा जी की और:) इन दोनों की मंशा क्या है मैं न जानता था। तुरंत से इन्होने अपने कपड़े उतारे और उतर गये गंगा जी में, मैं यहाँ तुम्हारे mobiles, gadgets या कपड़ों की रखवाली करने आया हूँ क्या? (मन में सोचा)। हूहू-हाहा करते मुझे नहाते हुए इशारा करने लगे कि भाई एक फोटो ले ले हमारी तो अनुभव बोला कि नहीं भाई मेरी तो अकेले की ही लियो।

घोर कलियुग है साहब!! पता नहीं कौन सी girlfriend है जिसने कहा होगा की अनुभव (please send me your pic while taking bath in Ganga ji:) ) मैंने भी इस शर्त के साथ photo click की , कि भाई तू बाहर आयेगा इसके बाद और मुझे नहाने देगा। इस बात पर Done! होने के बाद अब मेरी बारी थी। इसके बाद सचिन और मैं खूब मस्तियाँ करते रहे और अनुभव जी photos send करने में busy हो गये:) अपने आध्यात्मिक व सांसारिक जीवन में हम अपने लक्ष्य को पाएं  ऐसी कामना गंगा जी के समक्ष प्रकट करके व थोड़े से ध्यानोपरांत माँ गंगा का धन्यवाद किया और बढ़ चले हम अपनी मंजिल ऋषिकेश की ओर।

(सचिन को लगता है और वास्तविकता भी यही है कि present scenario भगवान का गुणानुवाद तो किया जाता है लेकिन ईश्वर के होने के प्रत्यक्ष प्रमाण बहुत कम मिलतें हैं या उसके लिए अत्यंत सरल होना पड़ता है जोकि सबसे कठिन कार्य है, वेद ग्रंथो में गंगा जी वर्णन है कि किस प्रकार से माँ गंगा का अवतरण भारतभूमि पर हुआ और माँ गंगा के होने का प्रत्यक्ष प्रमाण उनके दर्शन-स्नान से होने वाली अनुभूति ही है)

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आप भी जानते ही हैं रात को लम्बे सफर के बाद और नहाने के बाद जो से भूख लगना स्वाभाविक ही था, गरमा-गरम पूड़ियाँ-छोले, गुलाब जामुन, और बाद में मीठी लस्सी ने जो समां बांधा वो अपने आप में आनंद देने वाला था। अब हमने ऑटो पकड़ा और चल दिए ऋषीकेश की ओर। गर्मी इतनी भीष्म थी जैसे कि सूरज हम सबसे कोई personal दुश्मनी निकाल रहा हो लेकिन मैं तो चारों तरफ पहाड़ देख कर आनंदित हो रहा था।

खूब हंसी ठिठोली करते हुए हम पहुँच गये ऋषिकेश और चल दिए अपने होटल को। Divine Resort गंगा के किनारे बसा बहुत ही उत्तम होटल है। जैसे ही हम अपने रूम में पहुंचे तो अपने रूम से Ganga जी का View देखकर हमने सचिन की पीठ थपथपाई क्यूंकि होटल सचिन ने book किया था वो बात अलग है कि उसे सुनना भी बहुत पड़ा जब अनुभव और मैंने ये सुना कि होटल हुआ कितने में है और हमें इतने पैसे देने हैं 🙂 “जानकारी है यार, मेरी जानकारी है, बात हो गयी है” ये शब्द सुन के तो हमे भी लगता था कि हमारा फायदा ही सोचेगा सचिन लेकिन ये न पता था कि भाई अब कटाई शुरू हो चुकी है:) खैर! जो भी था बहुत ही बढ़िया था, मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था ऐसा था होटल रूम।

अमूमन क्या होता है कि होटल वो book करना चाहिए जो economical हो क्यूंकि रहना तो आपने सारा दिन बाहर ही है वो भी तब जब आप अपने कमीने दोस्तों के साथ गये हो, honeymoon suit जैसा रूम book करना मेरे हिसाब से ठीक न था। लेकिन one time experience तो बनता ही है:) होटल से दिखने वाला गंगा जी का view और river-rafting करते सैलानी वादियों को अपने शोरगुल से  गुंजायमान कर रहे थे।

Image result for divine resort rishikesh room view                                                       View of ganga ji from room

इसके बाद हमने एक शॉप से 2 Activa rent पर ली और चल दिए नीर water fall की और। प्रकृति की गोद में बसा अनोखा और अचंभित करने वाला दृश्य। 30 रूपये की टिकेट लेकर हम दुर्गम रास्ते से होते हुए पहुँच गये 2-2.5km ऊपर। कुछ लोग पैदल जाकर ही स्वयं को mountaineer साबित करना चाहते थे। लेकिन मुश्किल और लम्बे सफ़र को देख अपने आप को ठगा महसूस करते थे।

मैं अनुभव के साथ था और सचिन अकेला, रास्ते में अपने दोस्त के साथ जा रही एक लड़की जो चली तो खुद को mountaineer साबित करने ही थी थक गयी… और सचिन से लिफ्ट मांगने लगी और ऊपर तक उसके साथ ही पहुंची। इधर हम दोनों खुद को कोसें कि भाई मैं अकेला क्यों न था Activa पर (Men will be Men)।

ये तो हुई मजाक की बात लेकिन उसने सच्चे मन से किसी की help की थी:) गर्म-गर्म Maggie बनते देख मुहँ में पानी तो आया लेकिन Rate सुनते ही हमने lemon निम्बू पीना ही ठीक समझा। lemon नींबू पीने से पहले प्यास को बुझाना था, तो ठेले वाले ने इशारा किया कि सर ये नीर water fall का पानी आ रहा है इसे पी लीजिये।

ये कहते हुए उसने खुद भी दो घूँट पानी पीया, मुझे कुछ ठीक न लगा और lemon पीना ही ठीक समझा। अब और ऊपर जाने का रास्ता अति दुर्गम और कठिन था, पैर फिसला नहीं कि आप धड़ाम से नीचे। जैसे कैसे हम रोते धोते चल पड़े कि सचिन लाया है यहाँ तो जगह तो No-Doubt अच्छी होगी(hotel बढ़िया किया था न इसलिए)

वहां गये तो Rush इतना था कि पानी में उतरने की जगह नहीं मिल रही थी, कुछ लोग jumps लगा-लगा कर करतब दिखा रहे थे तो कुछ अपनी फुकरी के चलते सर फुडवा रहे थे(impressions you know:) ) प्राकृतिक नजारों के साथ-साथ लोगों के चारित्रिक नजारे भी देखने को मिले तो time पास हो गया:) भैंस की आँख!!! ये क्या हुआ.. जिस पानी में इतने सारे लोग नहा रहें हैं उस पानी को हमे पीने के लिए बोला गया था नीचे.. Thank God हमने नहीं पिया। अब बोरियत सचिन को कोसने (मजाक में) के साथ शुरू हो चुकी थी और फिर से हम चल दिए Activa वाली जगह की और। नीचे आकर थोडा ध्यान से देखा तो पाया कि lemon निम्बू वाले जूठे गिलास उसी नीर water से धोये जा रहे थे, शुक्र है हमने Nimboo पानी नहीं पिया 🙂          सीधा हम अपने होटल की तरफ चल दिए और वहां जाकर नहा धो कर हमने थकान उतारी और खाना खाया। रात को Full  on  AC चलाकर अपनी नींद की quality को चार चाँद लगाये। इन सपनों के साथ कि सुबह एक और अच्छी जगह जिसे सचिन Already Explore कर चुका है वहां जाना है। जगह थी वादियों से घिरा गंगा जी का एक ऐसा स्थान जो किसी साफ़ और स्वच्छ beach से कम ना था(awesome place it was)

Image result for river rafting starting point in rishikeshगंगा जी का रेतीला किनारा, River-Rafting के लिए जाते सैलानी, और sun-bath लेते foreigners आकर्षण का केंद्र थे:) गंगा जी की पवित्रता को भंग करते कुछ लोग ऐसे भी दिखे जिन्हें सिर्फ Beer bottles को ठंडा करने के लिए गंगा जी का उपयोग करना था (माँ है न इसलिए बेटों की किसी हरकत का बुरा नहीं मानती)।

अजी छोड़िये!! इन बातों को, शुरू हो चुका था वो युद्ध जो थमने का नाम नहीं ले रहा था। अनुभव, सचिन और मेरी लड़ाई:) थोड़ी देर enjoy करने के बाद हमें मस्ती सूझी और मारने लगे एक दुसरे को रेत के गोले बनाकर..:)  अनुभव की  company के कैमरे का जो कि water resistant था का खूब लाभ उठाया, लेकिन छिताई ज्यादा होने के कारण और stamina कम होने के चलते.. अनुभव दूर किनारे जाकर बैठ गया।

इस दौरान सचिन और मैं तब तक एक दुसरे से भिड़ते रहे जब तक थकावट अपने चरम तक न पहुँच गयी हो। कुल मिलकर ये पहली जगह थी जहाँ हमने full-too enjoy किया इसके बाद हम निकले वशिष्ट Caves  और जो कि हाईवे पर ही है rishikesh से approx 20-25km दूर।

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ये वो जगह है जहाँ ऋषि वशिष्ठ ने अपनी पत्नी अरुंधती के साथ जीवन यापन किया और तपस्या के बल पर इस स्थान को तपस्थली के रूप में विकसित किया। हम दर्शन के लिए अंदर गये तो केवल एक ज्योति जो कि शिवलिंग के साथ दिखाई दे रही थी और ध्यान आकर्षित कर रही थी। बाहर इतनी रोशनी से आने के बाद मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया और हवा में हाथ लहराते हुए मैंने बैठने के लिए एक स्थान चुना और देखा कि यहाँ पहले से कई लोग ध्यान मग्न हैं। अद्भुत, अविस्मर्णीय अनुभव था यह।  इतनी घोर शांति को किसी की हंसी अशांत कर रही थी.. कौन हो सकता था वह?  दायें-बाएँ देखा तो सचिन और अनुभव अपनी हंसी रोक न पा रहे थे, कारण मैं ना जानता था। इसी बीच ये लोग बाहर आ गये और पुजारी जी ने कहा कि 3 बजे विश्राम का समय है तो हमारे सचिन जी ने यह announce कर अपने आप को धन्य माना और कहा कि (its time to close the caves) ऐसी घोषणा english में करने से क्या लोगों को ये पता नहीं लगेगा कि शांति भंग करने के जिम्मेवार आप हैं:) मैंने कारण पुछा तो बताया कि अंकुश के हवा में हाथ लहराते हुए जगह ढूंढने को हमने funny पाया(लो कल्लो बात) हंसने वाली बात तो ना थी यह:)

गंगा जी के किनारे पत्थरों पर बैठ कर समय व्यतीत करने में जो आनंद था वो शायद ही हमे कहीं मिल सकता था। कुछ videos रिकॉर्ड की और कुछ songs, भजन इत्यादि गाने के बाद फिर से सचिन को कोसना शुरू हो चुका था कि अभी और समय यहाँ रहना है इसलिए जाने को मत बोल, लेकिन इस बार हमारी एक न चली क्यूंकि train का time हो रहा था और हमें हरिद्वार के लिए निकलना था, शताब्दी chair-car का मेरा पहला सफ़र था और उसमे मिलने वाले खाने का आनंद उठाकर हम वापिस दिल्ली पहुंचे और रात को सचिन के रूम पर रुक कर सुबह अपने अपने offices की  तरफ चल दिए। आज भी जब बात होती है तो ऋषिकेश के ये प्रसंग जरूर याद किये जाते हैं:)

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