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माँ मैं रैह्न्दा PG दे विच, तेरा विछोड़ा जरदां हाँ(PG में माँ की याद दिलाती कुछ lines)/Remembering Mom while living in PG

दोस्तों, इस दुनिया में भगवान भी जिसकी बराबरी नहीं कर सकता वो “माँ” है। लाखों यत्न-प्रयत्न करके पालने वाली उस माँ का कर्ज कभी चुकाया नहीं जा सकता। किसी शायर के शब्दों में :-

बहुत रोतें हैं मगर दामन हमारा नम नहीं होता, इन आखों के बरसने का कोई मौसम नहीं होता ।

मैं अपने दुश्मनों के बीच भी महफूज रहता हूँ  , मेरी माँ की दुआओं का खजाना कम नहीं होता ।।

इस तरह के भाव रखने वाली वो माँ जिसका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहता है उनके लिए कुछ पंजाबी की पंक्तिया मेरी कलम से आप सबको समर्पित हैं। याद कीजिये उन पलों को जब आप कहीं बाहर रहते थे चाहे वो पढाई के लिए रहें हों या नौकरी के लिए, उस समय को अपनी आँखों के सामने लाइए और ध्यान कीजिये माँ के बिन बिताये उन सभी लम्हों को जिसमे आपके साथ केवल माँ की याद थी।

 

माँ मैं रैह्न्दा पी. जी दे विच, तेरा विछोड़ा जरदा हाँ

तू सारा दिन चेते औंदी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ

 

घर तू मेरे कोल सी औंदी, प्यार नाल बाबू कह के जगोन्दी 

चल बीबा हुण कालेज जाना, छेल के मैनू बादाम खवौन्दी

चार परांठे आलू दे ने, लंच टाइम विच खा लवी

वांड वंडा न दवी सारे, कुज अपने टेड वी पा लवी

माँ तेरी ऐसे ममता नू , मैं ऐथे आके लबदा हां

तू सारा दिन चेते औंदी याद बड़ा तैनू करदा हां ………

 

ऐथे माँ उठया नी जौंदा, अलार्म वी जगा नई पौन्दा

ऐथे भज्जो भज्ज ही रेह्न्दी, नहाया वी चंगी तरह नी जांदा

आफिस जान दी हड-बड दे विच, खाना पीना भुल्ल गया हाँ

सेहतों बिलकुल माडा होया, तेरे बाझों रुल्ल गया हां

समोसे टिक्की बर्गर पिज्जे, नाल पेट हुण भरदा हाँ

तू सारा दिन चेते औन्दी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ……

 

माँ मैनू हुण समझ है आई, तू किन्नी चिंता करदी सी

जे मैं भुक्खा सो जांदा सी, तू बैके सिसकियाँ भरदी सी

शायद तू वी न खायी होवे, रोटी रज्ज के ओस रात नू

माँ मैं क्यों न समझ सी सकया, तेरे प्यार भरे जज्बात नू

माँ तेरी एस कुरबानी नू, मैं लख लख सजदे करदा हाँ

तू सारा दिन चेते औंदी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ…….

माँ ओ दिन हुण दूर नहीं, बड़ी जल्दी ओ दिन आएगा

इक इक कुर्बानी दा तेरी, एह पुत्तर मुल चुकाएगा

ऐसा कोई कम्म करांगा, तेरे मत्थे नू चमकावांगा

लैके तैनू बापू दे नाल, दुनियां दी सैर करावांगा

ऐही अरदास है ‘हंस’ दी हरदम, सच्चे पातशाह अग्गे मैं करदा हाँ

तू सारा दिन चेते औंदी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ…………….

अंकुश हंस

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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