लाखों वर्षों से बह रही नदियाँ आखिर मरने क्यों लगी “Please Support Rally For Rivers”

भारत हो या कोई भी देश, “नदियाँ” हर देश की Lifeline होती हैं और किसी भी संस्कृति या सभ्यता का विकास इन्हीं नदियों  के किनारे पर होता आया है और इसीलिए भारत को भी “सिन्धु घाटी की सभ्यता” या “Indus Valley Civilization” का परिणाम कहा जाता है।

हमारे शरीर में जिस प्रकार रक्त धमनियों (Blood Veins) का स्थान है ठीक उसी प्रकार नदियाँ भी किसी देश के विभिन्न मार्गों से होते हुए पूरे राष्ट्र को सिंचिंत करने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं शायद इसीलिए नदियों को भी माँ का स्थान दिया जाता है।

आखिर लाखों वर्षों से बह रही नदियाँ आज मरने क्यों लगी? भारत के अंदर बहुत सी नदियाँ ऐसी हैं जिनमें जल का प्रवाह केवल वर्षा ऋतू के समय देखा जा सकता है और साल के कई महीनों तक उनमें सूखा पड़ा रहता है उसका कारण चाहे प्रदूषण हो, रख रखाव न होना, जंगलों की कटाई और या फिर हमारी Ignorance. प्रकृति के प्रति हम कितने संवेदनशील है इस बात का अंदाज़ा एक उदाहरण से लगाया जा सकता है याद कीजिये कि हमारे दादा पड़दादा नदियों की बात किया करते थे, उसके बाद तालाबों की बात होने लगी, हमारे पिता जी की आयु के लोग कुओं की बातें करते थे और आज हम बोतलों के पानी पर आश्रित हैं, जरा ध्यान दीजिये की आने वाली पीढ़ी को चम्मच के पानी को भी तरसना पड़ सकता है ।ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो इसलिए हमें आज से ही विचारशील होना पड़ेगा।

नदियाँ न पिये कभी अपना जल

वृक्ष न खाए कभी अपना फल

अपने तन को, मन को, धन को  

जो करता बलिदान रे, वो सच्चा इन्सान रे….धरती पर भगवान रे….

ईशा फाउंडेशन के बैनर तले परम पूजनीय राष्ट्र संत जग्गी वासुदेव जी महाराज ने इस अभियान की ध्वजा को हाथ में ले हम सबका मार्ग प्रशस्त करने का काम किया है। इसमें उनका कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं है और मुझे भी इस सन्देश को प्रवाहित करने का कोई लाभ नहीं मिलने वाला लेकिन, मेरी और आपके आने वाली पीढ़ी को इसका लाभ जरूर मिलेगा।

 नदियों को सूखने से यदि बचाया न गया तो 2030 तक भारत का स्वरुप कैसा होगा और आज की स्थिति क्या है इसका अंदाज़ा निम्नलिखित बिन्दुओं से लगाया जा सकता है:

  • देश का 25% हिस्सा रेगिस्तान में तब्दील होने की कगार पर है। 
  • गोदावरी नदी अपने मूल प्रवाह से 20%, कावेरी 40%, नर्मदा और कृष्णा 60% तक छोटी हो चुकी हैं। 
  • 2030 तक हर भारतीय को अपने आज की आवश्यकता के मुकाबले 50% कम पानी मिलेगा।
  • यमुना नदी आज भारत की सबसे प्रदूषित नदी बन चुकी है। 
  • भारत में कुछ गाँव ऐसी भी हैं जहाँ पर पानी टैंकर के द्वारा पहुँचाया जाता है और प्रति व्यक्ति के हिसाब से 8 लीटर पानी 7 दिन के लिए दिया जाता है। 
  • बिहार के कुछ गांवों में पानी की कमी के चलते उपरी सतह से सूखी नदी को खोदकर पानी निकालने की खबरें कई मीडिया हाउसेस ने दिखाई हैं ।
  • National Crime Records Bureau (NCRB) के अनुसार वर्ष 2015-16 में  महाराष्ट्र (3,030), तेलंगाना(1,358), कर्नाटक(1,197), आन्ध्र प्रदेश (516), मध्य प्रदेश (581) और छत्तीसगढ़ (854) में किसानों ने कर्जे, या पानी की कमी से हुई फसल बर्बादी के चलते ख़ुदकुशी की ।                                                                                                                                    

हम क्या कर सकतें हैं?

  • सर्वप्रथम जो सबसे जरूरी है हमें Rally for Rivers का हिस्सा बनना है जिसमें हमें केवल 80009 80009 पर miscall करके अपना योगदान देना है और अधिक से अधिक लोगो को इस अभियान के साथ जोड़ना है
  • हमें सबसे पहले अपने घर और आस पास होने वाली पानी की बर्बादी को रोकना है और जितना जरूरत हो उतना की पानी का इस्तेमाल करना है ।
  • घर में किसी भी मेहमान के आने पर पानी का खाली गिलास और जग साथ में रख सकतें हैं ऐसा करने से जिसे जितनी आवश्यकता है वह उतना पानी ले सकता है।
  • पानी का इस्तेमाल यदि हम अधिक मात्रा में करना चाहतें हैं तो जंगलों का संरक्षण, और अधिक से अधिक पेड़ लगाना, नदियों को प्रदूषित होने से बचाकर हम अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन कर सकतें हैं।

पानी बचाने के सन्दर्भ में अनेकों अनेक तरीके हम प्रयोग में ला सकतें हैं, आप किस तरह पानी को बचाने में योगदान दे सकतें हैं या ऐसा कोई प्रयोग यदि आप जीवन कर रहें हैं तो हमारे साथ शेयर करना न भूलें ताकि और भी लोग इस से लाभ उठा सकें।

हमारी यह पोस्ट आपको कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स या hellonewsfellow@gmail.com पर ईमेल करके अवश्य बताएं।

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