सोच!!! जो हर दुःख से लड़ जाये../Power of positive thinking

पति पत्नी के पवित्र रिश्ते में बंधे वे दोनों अपना जीवन सुख-दुःख के ज्वार भाटे में व्यतीत कर रहे थे। जहाँ भी पति अपने जीवन मूल्यों से मुंह मोड़ता पत्नी मार्गदर्शक बनकर रास्ता दिखाती। शादी को हुए भी तो 25 साल हो चुके थे। प्रेम इतना प्रगाढ़ कि ईश्वर से टकरा जाये। होनी को न जाने क्या मंजूर था, पति बीमार हो गया। महीनों इलाज चला। लेकिन चलो!! किसी तरह जान बची। लम्बी बीमारी के बाद शरीर कमजोर सा हो गया। जिसके कारण पति परेशान सा रहने लगा, और उसका मन निराशा से भर गया। हमेशा माथे पर सिलवटों की चादर उसके चेहरे को और बूढ़ा बना रही थी।

           

पत्नी यह देख न सकी क्यूंकि उसके लिए यह किसी torture से कम न था। जो पति हमेशा उसके लिए अपनी बाहें खोल स्वागत करने को तैयार रहता था। वो आज उदास था। पत्नी से देखा न गया। पत्नी ने सोचा कि अपने पति को इस दुःख और निराशा के भंवर से बाहर निकालने  के लिए कहीं बाहर जाना चाहिए। और plan बना समुद्र के किनारे (beach) पर जाने का और वो भी पूरे एक हफ्ते का, क्यूंकि पति को समुद्र का किनारा बहुत पसंद था।

 

अजब आश्चर्य है कि यहाँ आकर भी पतिदेव गुमसुम ही बने बैठे हैं। आखिर बात क्या है? सारा-सारा time जिनके पास करने को बातें खत्म नहीं होती थी। वो आज इतने चुपचाप क्यों हैं? कुछ दिनों तक ऐसा ही चला। लेकिन एक दिन मौका देखकर पत्नी ने हिम्मत की और पति की आँखों में आँखें डालकर पूछा कि “जानू मैं काफी दिनों से देख रही हूँ, आखिर तुम सारा दिन क्या सोचते रहते हो? और अपने मनपसंद जगह पर आकर भी उदास हो?

पति ने एक लम्बी सी जम्हाई ली और अपनी चुप्पी तोड़ते हुए बोला कि “बात ही उदासी वाली है, मेरी बीमारी ने मुझे इतना कमजोर कर दिया, लाखों रुपये खर्च हो गये मेरा गॉल ब्लैडर निकाल दिया गया। इस बीमारी कि वजह से मेरी नौकरी चली गयी। हमारे बेटे का accident हो गया। जिसकी वजह से उसके दायें पैर की हड्डी टूट गयी। और इसी साल में ही तो, मेरे पिता का देहांत भी हो गया। इतने सारे दुखों के पहाड़ मुझ पर टूट पड़े और तुम मुझे खुश रहने के लिए, बात करने के लिए कह रही हो, इतना सब होने के बाद एक व्यक्ति कैसे मुस्कुरा सकता है?” इतना ही कहा था कि पति का गला अवरुद्ध हो गया और आंख में आया आंसू किनारे पर आकर चमकने लगा।

पत्नी सुनती रही और कुछ नहीं बोली, काफी समय के बाद पत्नी ने अपनी चुप्पी तोड़ी और धीरे से बोली “तुम्हे गॉल ब्लाडर की पथरी के कारण कितना दर्द रहता था। अच्छा हुआ ना !! अब वो दर्द तुम्हे जिंदगी भर परेशान नहीं करेगा।

पत्नी का बोलना जारी रहा और पति अवाक् सा होकर देखता रहा “देखो तुम समुद्र की इन बलखाती लहरों को देखकर कितना खुश हुआ करते थे। मुझे अपनी बाँहों में उठा लेते थे, इन लहरों पर अपने मन को सवार कर मेरे लिए शायरी के मोती ढूंढ लाते थे। और कहीं ना कहीं तुम भी तो यही चाहते थे कि रिटायरमेंट के बाद हम कहीं समुद्र के किनारे जाकर लम्बा वक्त बिताएं, और ऐसे पलों को जिएं। पत्नी ने सवालिया निगाहों से पति की तरफ घूरा और बोला कि मैं कहीं कुछ गलत……

अब पति को कुछ सूझ नहीं रहा था बात को घुमाना ही आखिरी चारा था। क्यूंकि अपने सवालों का जवाब मिलने लगा था। इधर उधर देख कर बोला कि पिता जी का आकस्मिक निधन, हमारे बेटे का accident भी तो…………

इसपर भी पत्नी के सारे जवाब तैयार थे। धीरे से अपनी जुबां से बोली “पिता जी के जाने का मुझे अत्यंत दुःख है कि उनके जाने से प्रतिदिन मिलने वाले आशीर्वाद से हम वंचित हो गये। लेकिन आप भी सोचिये कि उन्होंने अपना जीवन कितनी शान से जिया। किसी बीमारी को पास नहीं आने दिया, जिसकी वजह से बुढापे में भी अपना सारा काम स्वयं करते थे। और किसी पर dependent भी नहीं रहे। अगर इस उम्र में शारीरिक कमजोरी के कारण किसी की दया पर जीते तो उन्हें कितना बुरा लगता। पत्नी ने पति के हाथों को अपने हाथों में लिया और बोली-कि बेटे के accident ने स्वाभाविक ही मुझे सदमे में ला दिया था, लेकिन इतने भयानक accident के बाद भी उसके पैर की हड्डी ही टूटी। कहीं न कहीं हमारे कर्मो में था, कि बेटा हमेशा हमारे साथ रहे। नहीं तो उसकी जान भी जा सकती थी। धन्यवादी होना चाहिए हमे परमपिता परमात्मा का जिनकी कृपा से उसकी जान बची।

पति के माथे पर आई सिलवटों की चादर आकाश में छाई बदली की तरह छंटने लगी थी। उसने अपनी पत्नी को प्यार भरी निगाहों से देखा ही था कि एक बड़ी सी लहर उनकी तरफ आई और दोनों को भिगो कर चली गयी। पति के मन से निराशा का धुंआ छंट चुका था, और लौट चुका था वो अपने जवानी के दिनों में। इतना हुआ ही था कि जोश से भरे पति ने पत्नी को अपनी बाँहों में उठाया और चल पड़ा समुद्र की ओर।

तो भैया! जीवन में आने वाले किसी भी प्रकार के सुख दुःख हमारी सोच ही निर्धारित करती है सकारात्मक सोच से सब कुछ संभव हो सकता है। आप अपने भी जीवन में positive thinking के प्रभाव को अवश्य अनुभव करेंगे ऐसी कामना है।

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