Newsfellow.com Inspirational पूरी दुनियां को अपने में समेटता एक शब्द “माँ”

पूरी दुनियां को अपने में समेटता एक शब्द “माँ”



Hello Fellows,

हम सबके जीवन की शुरुआत अपनी माँ से ही होती है और शायद इसीलिए माँ को मनुष्य का प्रथम गुरु कहा जाता है क्योंकि यही वो अद्भुत शक्ति है जो हमें बचपन से हमारा पालन पोषण कर अच्छे और बुरे में भेद करना सिखाती है।  “माँ” केवल एक शब्द नहीं बल्कि पूरी दुनियां को अपने में समेटने का नाम है।

पिता यदि परिवार रुपी माला का मोती है तो “माँ” उस माला में धागे के समान है जो परिवार को उसमें पिरोकर रखती है। बचपन से ही हमारी हर छोटी बड़ी ख्वाहिशों के ख्याल रखने वाली माँ की तुलना किसी और से नहीं की जा सकती।

निस्वार्थ भाव से अपनी हर सन्तान की परवरिश करना ही एक माँ का परम कर्तव्य होता है,  बिना किसी लोभ लालच के अपनी हर संतान को समान रूप से प्यार देती है शायद इसीलिए ही माँ को भगवान का दर्जा प्राप्त है।

किसी शायर के शब्दों में :-

 

बहुत रोतें हैं मगर दामन हमारा नम नहीं होता, इन आखों के बरसने का कोई मौसम नहीं होता ।

मैं अपने दुश्मनों के बीच भी महफूज रहता हूँ  , मेरी माँ की दुआओं का खजाना कम नहीं होता ।।

इस तरह के भाव रखने वाली वो माँ जिसका आशीर्वाद हमेशा हमारे साथ रहता है उनके लिए कुछ पंजाबी की पंक्तिया मेरी कलम से आप सबको समर्पित हैं। याद कीजिये उन पलों को जब आप कहीं बाहर रहते थे चाहे वो पढाई के लिए रहें हों या नौकरी के लिए, उस समय को अपनी आँखों के सामने लाइए और ध्यान कीजिये माँ के बिन बिताये उन सभी लम्हों को जिसमे आपके साथ केवल माँ की याद थी।

माँ मैं रैह्न्दा पी. जी दे विच, तेरा विछोड़ा जरदा हाँ

तू सारा दिन चेते औंदी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ

 

घर तू मेरे कोल सी औंदी, प्यार नाल बाबू कह के जगोन्दी 

चल बीबा हुण कालेज जाना, छेल के मैनू बादाम खवौन्दी

चार परांठे आलू दे ने, लंच टाइम विच खा लवी

वांड वंडा न दवी सारे, कुज अपने टेड वी पा लवी

माँ तेरी ऐसे ममता नू , मैं ऐथे आके लबदा हां

तू सारा दिन चेते औंदी याद बड़ा तैनू करदा हां ………

 

ऐथे माँ उठया नी जौंदा, अलार्म वी जगा नई पौन्दा

ऐथे भज्जो भज्ज ही रेह्न्दी, नहाया वी चंगी तरह नी जांदा

आफिस जान दी हड-बड दे विच, खाना पीना भुल्ल गया हाँ

सेहतों बिलकुल माडा होया, तेरे बाझों रुल्ल गया हां

समोसे टिक्की बर्गर पिज्जे, नाल पेट हुण भरदा हाँ

तू सारा दिन चेते औन्दी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ……

 

माँ मैनू हुण समझ है आई, तू किन्नी चिंता करदी सी

जे मैं भुक्खा सो जांदा सी, तू बैके सिसकियाँ भरदी सी

शायद तू वी न खायी होवे, रोटी रज्ज के ओस रात नू

माँ मैं क्यों न समझ सी सकया, तेरे प्यार भरे जज्बात नू

माँ तेरी एस कुरबानी नू, मैं लख लख सजदे करदा हाँ

तू सारा दिन चेते औंदी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ…….

माँ ओ दिन हुण दूर नहीं, बड़ी जल्दी ओ दिन आएगा

इक इक कुर्बानी दा तेरी, एह पुत्तर मुल चुकाएगा

ऐसा कोई कम्म करांगा, तेरे मत्थे नू चमकावांगा

लैके तैनू बापू दे नाल, दुनियां दी सैर करावांगा

ऐही अरदास है ‘हंस’ दी हरदम, सच्चे पातशाह अग्गे मैं करदा हाँ

तू सारा दिन चेते औंदी, याद बड़ा तैनू करदा हाँ…………….

अंकुश हंस

भारतीय सभ्यता की बात करें तो हर दिन ही मातृ दिवस होता है उनके लिए जो अपने माता पिता के साथ रहतें हैं,  लेकिन यह दिन पश्चिम के देशों में इसलिए ज्यादा प्रचलित है क्योंकि माता पिता अपने बच्चों से अलग रहतें हैं और व्यस्तताओं के चलते बच्चों के पास भी माँ-बाप को मिलने का टाइम तक नहीं होता।

देखा जाये तो इसमें कोई बुराई भी नहीं है at least एक दिन ही सही माता पिता को स्पेशल feel करवाना और उन्हें अपना सारा समय देना भी बूढ़े माँ-बाप को प्रेम का एहसास करवाता है

“लबों पे उसके कभी बददुआ नहीं होती

          बस एक माँ है जो मुझसे खफा नहीं होती”  🙂

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3 thoughts on “पूरी दुनियां को अपने में समेटता एक शब्द “माँ””

  1. Sparsh Hans says:

    This is the one of the best poem I have read in my life. Keep it up.

  2. Mehak Bajaj says:

    Very nice

  3. Mehak Bajaj says:

    Very nice

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