आखिर क्या मांगें हैं मंदसौर के किसानों की?Mandsor Farmer’s Protest!!!!!

आखिर क्या मांगें हैं मंदसौर के किसानों की?Mandsor Farmer’s Protest!!!!!

मंदसौर, मध्य प्रदेश में किसानो का प्रदर्शन मंगलवार को उग्र होने के साथ साथ बेकाबू भी हो गया । किसानो द्वारा किये जाने वाले प्रदर्शन को सँभालने के लिए CRPF ने दो बार फायरिंग भी कि जिसमे 6 किसानों के मारे जाने के  साथ 8 किसानो  के घायल होने की खबर है इस घटना के बाद हालात बिगड़ते देख और इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है । बुधवार को भी हालात सामान्य नहीं हुए और दिन भी SP और किसानो के बीच हिंसक झड़प की खबरें आई और कलेक्टर के कपड़े तक फाड़ दिए गये । किसानों के लिए अच्छे दिन लाने वाली सरकार  कहीं न कहीं विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आ गयी है ।

शुरुआत कहां से हुई? 

मध्य प्रदेश के किसान कर्ज और जमीन खरीदी में मिले कम मुआवजे से परेशान हैं और आन्दोलन करने की प्रेरणा उन्हें महाराष्ट्र के किसानों से मिली । आपको भी याद होगा कुछ समय पहले महाराष्ट्र के किसानों  ने सडकों पर दूध बहाकर और सब्जियों को फेंककर प्रदर्शन किया था । महाराष्ट्र के इसी किसान क्रांति मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन करने वाले किसानों का आंदोलन जब मध्य प्रदेश पहुंचा, तो किसान अपनी आवाज सरकार तक पहूँचाने के लिए मंदसौर में इकट्ठा हुए ज्यादा संख्या में पहुंचे । प्रशासन ने पुलिस को आदेश सुबह ही जारी कर दिए थे कि आन्दोलनकारियों से सख्ती से निपटा जाए । इसके बाद जब किसान उग्र हुए तो उन्होंने मंदसौर-पिपलिया मंडी के बीच 8 ट्रकों और 2 मोटरसाइकिलों में आग लगा दी और एक पुलिस चौकी में आग लगा दी जिसकी वजह से पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी और 6 किसानो की मौत हो गयी गुस्साए किसानो ने इस बात की चलते प्रदेश में बंद का एलान किया है।

आखिर चाहतें क्या है किसान? 

मुख्य रूप से गेहूं, सोयाबीन और चना की फसलें पूरे मध्य प्रदेश में होती हैं, लेकिन आंदोलन वाली जगहों के किसान मेथी, धनिया, जीरा और अजवाइन, इसबगोल,अदरक, मूसली और अश्वगंधा जैसी औषधियां भी उगाते हैं। वर्तमान समस्या फसलों की कीमत घटना और वाजिब दाम न मिलना है। उदाहरण के तौर पर मेथी साल 2016 में 4000-4500 रु. प्रति क्विंटल बिकी थी, जबकि इस साल इसकी कीमत 2500-3000 रु. प्रति क्विंटल रह गई। नासिक(महाराष्ट्र) में पिछले साल 800 रु. प्रति क्विंटल बिकने वाला प्याज इस साल 450 रु. प्रति क्विंटल ही बिका।

केदार पटेल और जगदीश रावलिया जो कि किसान सेना के संयोजक हैं ने बताया कि किसानो ने 32 मांगे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सामने रखी थी जिनमे से कुछ को मान लिया गया है। लेकिन किसान चाहतें हैं कि सरकार एक कानून बनाकर किसानों की जमीन लेने के बदले मुआवजे की धारा 34 को हटा दिया जाये, आपको बता दें कि इस धारा के तहत किसानों के पास कोर्ट जाने का अधिकार नहीं है ।

कांग्रेस का रुख:

मध्य प्रदेश में अपने अस्तित्व को तलाशती कांग्रेस अचानक आक्रामक हो गयी है । दिग्विजय सिंह, राहुल गाँधी, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एमपी सरकार की मंशा पर सवाल उठाये हैं और बुधवार को प्रदेश बंद का एलान भी किया वही राहुल को मंदसौर जाने की इजाजत नहीं मिल पाई मध्य प्रदेश प्रशासन ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए मंदसौर आने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। लेकिन राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर कहा है कि वह गुरुवार को पीड़ित परिवारों से मिलने मंदसौर जाएंगे। ऐसे में गुरुवार को प्रशासन और उनके बीच टकराव बनने की सम्भावना है।

सरकार ने क्या किया?

मध्य प्रदेश सरकार ने देर न करते हुए और मामले की  गंभीरता को देखते हुए मृतक के परिजनों को 1-1 करोड़, परिवार के किसी सदस्य को नौकरी, और घायल को 5 लाख का मुआवजा और मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया है । यदि यह आश्वासन हकीकत में तब्दील होता है तो मध्य प्रदेश में दी जाने वाली यह सबसे बड़ी सरकारी मदद होगी । इस मामले के चलते शिवराज सिंह ने अपने सारे कार्यक्रम भी रद्द कर दिए हैं ।

 

1 Comment

  1. मारे गए 6 लोगों में से एक प्रशासनिक अधिकारी हैं जिन्हें, प्रदर्शनकारियों ने मारा था इसीलिए जवाबी कार्यवाही में 5 किसान भी मारे गए| विपक्ष के पूरजोर प्रदर्शनों का दौर है साहब, बी.जे.पी. शासित सभी राज्यों में मुद्दे ढूंढ कर खुनी प्रदर्शन किये जा रहे हैं | तथ्यों के आधार पर सटीक लेख है परन्तु दिशा राष्ट्रवादी रखें, तो समाज में सही सन्देश जायेगा !!

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