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चंडीगढ़ में “माँ का प्यार” बांटती अंबाला की “राधिका अरोड़ा”

Hello Fellows,

हर सोमवार को जब मैं अपने घर से ऑफिस के लिए गुडगाँव जाता था तो माँ खाने पीने का बहुत सा सामान पैक करके दे देती थी, दूर दराज से आये हुए बहुत से दोस्त जो हर weekend घर नहीं जा पाते थे लंच टाइम होते ही मेरे इर्द-गिर्द इकट्ठे हो जाते थे और पूछते थे कि आज क्या आया है तो मैं कहता था कि माँ के हाथ के बने परांठे, Toast, खीर वगैरह लाया हूँ। मिल बैठ कर खाने से माँ का प्यार मेरे हर दोस्त तक पहुँच जाता था और समय समय पर उनके द्वारा भी ऐसा ही किया जाता था।

आपकी और मेरी तरह हम सबको पढ़ाई करने के बाद एक अच्छी कंपनी में नौकरी करने की दरकार रहती है और जब तक एक अच्छी नौकरी नहीं ले लेते जीवन के बहुत से decisions को ठंडे बस्ते में डालना पड़ता है।

लेकिन कुछ युवा ऐसे हैं जो लीक से हटकर अपने सपनों को साकार करने में लगें हैं और शायद ऐसे लोगों को 9-5 वाली जॉब रास नहीं आती। मन में विश्वास हो और कुछ कर गुजरने की चाहत हो तो क्या नहीं किया जा सकता लेकिन उसके लिए भी शर्त यह है की आपके प्रयास निरंतर होने चाहियें।

बहुत से लोग होतें हैं जो IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से साइंस की पढ़ाई करतें हैं लेकिन उनका बिज़नेस या प्रोफेशन उनकी पढ़ाई के बिलकुल उल्टा होता है। मेरे व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार आपको बहुत से लोग ऐसे मिलेंगे जो आपको आपकी डिग्री की दुहाई देंगे कि अगर ये ही करना था तो ये डिग्री क्यों कर ली।

इसी कड़ी में “राधिका अरोड़ा” एक ऐसी मिसाल बनी हैं जिन्होंने कभी पढ़ाई को एक डिग्री के लिए न करके अपने मन का करने की ठानी और सफलता को अपने कदम चूमने के लिए मजबूर कर दिया। अपने शौक को ही अपना प्रोफेशन बना लेना और उससे धन कमाने का साधन बनाना ही वास्तविक उद्यमिता है,  और ये बात नोट करना कि ऐसे लोग अपने काम से खुश भी होतें हैं और संतुष्ट भी, भले ही मेहनत किसी नौकरी से ज्यादा करनी हो लेकिन ऐसे लोग इस बात से हमेशा परिचित रहतें हैं कि “जितना गुड़ डालेंगे, मीठा उतना ही ज्यादा होने वाला है”  

माँ का प्यार

Yourstory को दिए गये इंटरव्यू में राधिका बताती हैं कि चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ़ कॉलेज से MBA करने के बाद नौकरी के लिए उन्हें घर से बाहर PG में रहना पड़ता था, वहां का खाना उन्हें पसंद नहीं आता था इसलिए या तो बाहर खाना और या टिफ़िन मंगवाना ही आखिरी आप्शन बचता था।  माँ के हाथों से बने खाने को इतना मिस करती थी कि एक दिन उन्हें खाने के ठेला लगाने का ख्याल आया और हिम्मत करके नौकरी छोड़ दी और “नये ठेले का नाम था #माँ का प्यारजो मोहाली में इंडस्ट्रियल एरिया फेज-8 में लगता है।

लिंक पर क्लिक करें: PG में माँ के हाथ का बना खाने की बहुत याद आती है तो ये कविता आपके लिए ही है  

शुरुआत में राधिका 70 प्लेट खाना ही तैयार करती थी जो कि देखते ही देखते बिक जाता था इसके बाद उन्होंने इसकी संख्या बढ़ा दी, लोगों को घर जैसा खाना खिलाने से उन्हें ख़ुशी मिलती है और कहीं न कहीं इस field में टिक पाने का राज भी यह है कि घर जैसा खाना डिलीवर करने में वो कोई compromise नहीं करती, उन्होंने ने एक कुक रखा है जो घर जैसा खाना बनाता है और कुल 5 लोगों की टीम इस बिज़नस को हैंडल करती है।।

फ़ूड कार्ट गर्ल

पंजाब केसरी में दिए गये एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि स्टार्टिंग में उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा जैसे कि पुलिस प्रशासन, म्युनिसिपेलिटी, दुसरे ठेले वालों का विरोध आदि आदि। प्रशासन से अनुमति लेने के बाद और उनके जज्बे के चलते उन्हें उनके रास्ते से कोई हटा नहीं पाया।

1 लाख रूपये से राधिका ने यह बिज़नेस शुरू किया और देखते ही देखते राहें बनती गयी और इसी की बदौलत जीरकपुर VIP रोड में एक और ठेले की शुरुआत हो गयी। अब वे फ़ूड डिलीवरी और इवेंट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी हाथ आजमाना चाहती है।

जरूरी यह नहीं है कि काम कैसा है, बल्कि उस काम के प्रति आपकी निष्ठा और धैर्य ही सबसे जरूरी है, सर्दी गर्मी की परवाह किये बिना जैसे-जैसे आप आगे बढतें हैं आपके सजदे में उन लोगों की संख्या भी बढ़ती है जिन्होंने कभी आपका मज़ाक बनाया तो कभी आपकी इच्छाओं और आकांक्षाओं को underestimate भी किया।

एक कहावत के अनुसार “चढ़ते सूरज को सब सलाम करतें हैं। ” 

अपनी जानकारी भी बढायें :

  1. पूरे विश्व में खाने पीने से जुड़ा व्यापार सबसे अधिक चलने वाले बिज़नेस में से एक है। 
  2. भारत में यह व्यापार हर साल 6% की दर से बढ़ रहा है ।  
  3. वर्तमान में अकेले भारत में खाने पीने का टोटल व्यापार 430000000000 रूपये (तैंतालीस हजार करोड़) का है।  
  4. अकेले दिल्ली में हर महीने 10 नये फ़ूड outlet खुलतें है।  (रेहड़ी, ठेले इत्यादि अलग है)
  5. रेस्टोरेंट के बिज़नस में profit 40%-50% तक होता है जबकि प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट करने से हर साल 25% का इजाफ़ा होता है।  
  6. 365 दिन चलने वाला बिज़नस। 

इतनी सारी खूबियों के साथ इस बिज़नस में रिस्क यह है कि खाने की क्वालिटी अगर maintain नहीं रहती तो लोगों का मन उठने लगता है और शायद यही कारण है कि दुनियाभर में चलने वाले हर 10 में से 9 रेस्टोरेंट इसीलिए बंद हो जातें हैं।

दोस्तों! आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी हमें कमेंट बॉक्स में कमेंट के माध्यम से या hellonewsfellow@gmail.com पर ईमेल करके अवश्य बताएं।

 

 

3 thoughts on “चंडीगढ़ में “माँ का प्यार” बांटती अंबाला की “राधिका अरोड़ा”

  1. Wow..people are not restricting themselves to white collar jobs only and coming out to do such a motivational business which can motivate others to start something of their choice!!

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