Newsfellow.com News क्या आपको भगवान श्रीकृष्ण की 70 पीढियां, 8 पटरानियाँ और 80 पुत्रों के नामों की जानकारी है?Lord Krishna: his ancestors, Queens and their 80 sons.

क्या आपको भगवान श्रीकृष्ण की 70 पीढियां, 8 पटरानियाँ और 80 पुत्रों के नामों की जानकारी है?Lord Krishna: his ancestors, Queens and their 80 sons.



युगों युगों से मनाया जाने वाला पावन जन्माष्टमी का त्यौहार भारतवर्ष को एकसूत्र में बांधने की कोशिश करता है। जहाँ हर जाति-मत, पंथ सम्प्रदाय का बच्चा कृष्ण बनने की जिद करता है वहीँ हर माँ अपने बेटे में भगवान कृष्ण के और अपनी बेटी में राधा रानी के दर्शन करती है। मन में उमंग का संचार करता यह त्यौहार कान्हा के बाल रूप की याद दिलाता है।

कृष्ण एक ऐसे अवतार का नाम है जिसने काल कोठरी में जन्म लिया और महलों का सुख भी भोगा, बचपन में बंसी बजाई लेकिन युद्ध के शंख को बजाने से भी परहेज नहीं किया, गुलेल से मटकी तो फोड़ी ही लेकिन अन्याय के विरूद्ध सुदर्शन चलाने से भी नहीं चूके, गोपियों संग हंसी ठिठोरी तो की परन्तु “गीता ज्ञान” का अम्रृत पान भी इस संसार को करवाया, माता पिता के प्रति कर्तव्यों को अच्छे से निभाने के साथ साथ धर्म के लिए मोह का त्याग कैसे किया जाता है यह भी सिखाया। 

भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास,शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ दुष्टों के संहार के लिए कारागार में भगवान एक योजना के अनुसार अवतरित हुए। वास्तव में यह माँ देवकी और पिता वासुदेव के पिछले जन्म का फल था जो उन्हें द्वापर युग में प्राप्त हुआ। पूर्वजन्म में माँ देवकी भगवान विष्णु की उपासक थी और कई वर्षों की तपस्या के फलस्वरूप उन्हें भगवान ने दर्शन दिए और वरदान दिया कि हे देवी! द्वापर युग में धर्म की स्थापना के लिए मेरा जन्म आपके ही गर्भ से होगा और आप मुझे पुत्र रूप में प्राप्त करेंगी।

परन्तु भारतभूमि का एक और संस्कार यह भी है कि धर्मसंस्थापना के लिए भले ही अपना परिवार ही कुर्बान क्यों न करना पड़े चाहे वो देवकी की संताने हों या गुरु गोबिंद सिंह जी का परिवार हम कभी पीछे नहीं हटे। यही बात माँ देवकी के मन में भी रही होगी कि यदि मेरा भाई कंस अत्याचारी, निरंकुश,पापाचारी, अहंकारी है और धर्म स्थापना के लिए उसका वध होना आवश्यक है तो मैं, देवकी अपनी कोख को इस राष्ट्रहित कार्य के लिए सहर्ष देती हूँ,चाहे मुझे कितने ही कष्ट व वेदना सहन क्यों करनी पड़े। जरा सोचिए एक प्राणप्रिय बहन देवकी, भाई की बगल बैठ सत्ता का सुख भोग सकती थी। क्यों वह 9 महीनों की कठोर प्रसव पीड़ा सहती। क्यो वह अपने रक्त को अपनी आंखों से बहता देखती। वो भी एक बार नही, दो बार नही, छ: बार। क्यों वह अपने प्राणप्रिय भाई की मृत्यु का कारण बनना चाहती। ऐसा था देवकी का राष्ट्रीय चरित्र। ऐसी सभी माओं को हृदय से चरण वंदन।  

जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में देश भर में और अब तो विदेशों में भी Iskon के माध्यम से जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और भगवान कृष्ण का गीतामृत मानव जाति के कल्याण में किस प्रकार सहायक हो सकता है इसका प्रचार और प्रसार किया जाता है। हम सभी भगवान मधुसूदन के अनेक नामों से तो परिचित होंगे लेकिन आईये इस पोस्ट के माध्यम से उनकी पीढ़ियों, पटरानियों और उनके पुत्रों से भी परिचित होने का सौभाग्य प्राप्त करतें हैं। भगवान कृष्ण की 70 पीढ़ियों का वर्णन इस प्रकार है:

1. ब्रह्मा 
2. दक्ष 
3. विवस्वत 
4. मनु 
5. चन्द्र
6. पुरुरवा 
7. आयु 
8. नहुष 
9. ययाति
10. यदु        
11. क्रोश्तु     
12. वृज्जिवंता   
13. स्वहि 
14. स्वाति
15. रसदु      
16. चित्ररथ      
17. शशबिन्दु
18. पृथुसर्वास
19. अंतर
20. सुयज्ना
21. उषानस
22. शिनेयु
23. मरुता
24.कम्बलबर्हिस 
25. रुक्मकवच 
26. परव्रुश्ता 
27. जयमध 
28. विदर्भ 
29. करय 
30. कुंती 
31. धष्टि 
32. निव्रुती 
33. दशाई 
34. व्योम 
35. जिमुत 
36. विकृति 
37. भीमरथ 
38. रथवर 
39. नवरथ
40. दशरथ
41. एकादशरथ
42. शकुनि
43. कुराम्भी
44. देवरत
45. देवक्षेत्र
46. देवन
47. मधु
48. पुरुवश
49. पुरुहोत्रा 
50. अंशु 
51. सतवत 
52. भीम
53. भजमन 
54. चित्ररथ 
55. विदुरथ 
56. शूर 
57. शरमन 
58. प्रतिक्षत्र 
59. स्वयम्भोज
60. हृदिक 
61. देव्भिथुष 
62. शूर 
63. वासुदेव 
64. कृष्ण 
65. प्रद्युम्न्न 
66. अनिरुद्ध 
67. वज्रंबाहा 
68. प्रतिबहु 
69. सुबाहु 
70. शंतासेन 

आईये अब जानतें हैं भगवान की 8 पटरानियाँ और 80 पुत्रों से जुड़ी जानकारी:

A. श्रीकृष्ण-रुक्मिणी जी से संतानें : 

  1. प्रद्युम्न्न
  2. चारू देशना
  3. सुदेशना
  4. चारुदेहा
  5. सुचारू
  6. चारुगुप्ता
  7. भद्राचारू
  8. चारुचंद्र
  9. विचारू
  10. चारू

B. श्रीकृष्ण-सत्यभामा जी से संतानें:

  1. भानु
  2. सुभानु
  3. स्वभाणु
  4. प्रभानु
  5. भानुमान
  6. चंद्रभानु
  7. ब्रुहदभाणु
  8. अतिभानु
  9. श्रीभानु
  10. प्रतिभानु

C. श्री कृष्ण-जाम्भवती जी से संतानें:

  1. संबा
  2. सुमित्रा
  3. पुरुजित
  4. शतजित
  5. सहस्रजित
  6. विजय
  7. चित्रकेतु
  8. वासुमान
  9. द्रविन
  10. क्रुतु

D. श्रीकृष्ण-कालिंदी जी से संतानें:

  1. श्रुत
  2. कवि
  3. वृष
  4. वीर
  5. सुबाहु
  6. भद्रा
  7. शांति
  8. दरश
  9. पूर्णमास
  10. सोमक

E. श्रीकृष्ण-नगंजिती (सत्या) जी से संतानें:

  1. वीर
  2. चन्द्र
  3. अश्वसेन
  4. चित्रागु
  5. वेगवान
  6. वृश
  7. आम
  8. शंकु
  9. वासु
  10. कुंती

F. श्री कृष्ण-भद्रा(शैब्या) जी से संतानें:

  1. संग्रामजित
  2. बृहत्सेन
  3. शूर
  4. प्रहरण
  5. अरिजीत
  6. जय
  7. सुभद्रा
  8. वाम
  9. आयु
  10. सात्यक

G. श्रीकृष्ण-लक्ष्मणा जी से संताने:

  1. प्रबोध
  2. गत्रावान
  3. सिंह
  4. बल
  5. प्रबल
  6. उर्ध्वग
  7. महाशक्ति
  8. सह
  9. ओज
  10. अपराजित

H. श्रीकृष्ण-मित्रविंदा जी से संतानें:

  1. वृक
  2. हर्ष
  3. अनिल
  4. गृध्रा
  5. वर्द्धन
  6. अन्नद
  7. महाश
  8. पावन
  9. वन्हि
  10. क्षुधि   
    दोस्तों!! आपको हमारी ये पोस्ट कैसी लगी हमें hellonewsfellow@gmail.com पर mail करके या नीचे comment box में कमेंट करके अवश्य बताएं। और इसी के साथ आपको व आपके परिवार को newsfellow.com की तरफ से जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

 

3 thoughts on “क्या आपको भगवान श्रीकृष्ण की 70 पीढियां, 8 पटरानियाँ और 80 पुत्रों के नामों की जानकारी है?Lord Krishna: his ancestors, Queens and their 80 sons.”

  1. Krish says:

    Jai shri krishna…

  2. Gurpreet Singh says:

    Nice information.. जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं..

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