कैसे रोकें मन की बकबक को/how to control mind’s chattering

जब भी हम मौन होतें हैं तब भी अपने मन को बडबडाते हुए महसूस करते हैं इस से हमें परेशानी होती है और हमारे विचार वर्तमान, भविष्य, और अतीत में खोए रहतें हैं। जिससे कोई फायदा नहीं होने वाला, अब हम जानना चाहतें हैं कि इस से छुटकारा कैसे पाया जाये ।

आपको बता दें कि विचारशून्यता पर बहुत विचार हो चुका है और इन शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया है। खुद सोचिये कि लाखों सालों से  प्रकृति की मेहनत का नतीजा है कि आपके पास एक ऐसा मन है जो multi dimensional है और अब आप इसे रोकना चाहतें हैं। Multi-tasking और multi-programming के ज़माने में आप चाहतें हैं कि हमारा दिमाग विचारशून्य हो जाये। आप ऐसा क्यों करना चाहतें हैं ? अगर आपका मन आपके लिए हमेशा ही आपको खुश करने वाली चीज़ें सोचता तो क्या आप इसे रोकने की सोचते?……. नहीं!!!!! कहीं न कहीं आप जानतें हैं कि आपका मन बहुत सी दुःख पैदा करने वाली बातें सोच रहा है, इसलिए आप उसे रोकना चाहतें हैं। पूरा संसार इस बात से परेशान है कि मन को रोका कैसे जाये? तो इसका एक उत्तर ये हो सकता है कि अगर आप अपने दिल, गुर्दे, और लीवर को काम करने से रोक दें तो मन की इस गतिविधि को भी रोका जा सकता है। क्या आप इन सबको रोकना चाहतें हैं? दोबारा से आपका उत्तर “NO” ही होगा। तो आप दिमाग को क्यों रोकना चाहतें हैं? आप अपने मन/दिमाग के साथ इतना भेदभाव क्यों करतें हैं? दिल काम करता है तो आप ध्यान कर सकतें हैं, लीवर, गुर्दे अपना काम कर रहें हैं तो आप ध्यान कर सकतें हैं लेकिन अगर दिमाग अपना काम कर रहा है तो आप उसे रोकना क्यों चाहतें हैं?

ये सिर्फ और सिर्फ इंसानी समझ के खिलाफ मूर्खों की साजिश है कि ध्यान के समय दिमाग जम जाना चाहिए, कल्पना कीजिये कि आप traffic जाम में फंसे हैं तो आप स्वयं को परेशान पाएंगे, लेकिन अगर आप हवाई जहाज से नीचे traffic देख रहें हैं तो आपको आनंद की अनुभूति होगी ऐसा इसलिए क्यूंकि आपके बीच एक दूरी है। एक बार अगर आपके और विचारों के बीच दूरी आ जाती है तो मन समस्या नहीं रह जाता। चलिए इसे भी छोड़िये!!! और मान लीजिये कि आपको दस्त लगें हैं तो इसका कारण क्या है ? निश्चित रूप से आपने कोई गलत खाना खाया है। अगर इसी context में कहूँ कि आपको mental डायरिया हुआ है तो स्वाभाविक है आपने कोई गलत विचार ग्रहण कियें हैं और इन्ही विचारों का traffic है जो आपको रास्ता नहीं दे रहा है। मान लीजिये, आप एक office मीटिंग में हाथों की उंगलियों को आपस में फसाकर, टांग  पर टांग चढ़ाकर बैठें हैं, क्या ऐसा इसलिए कि वो कहीं खुद से न चलने लगें? बल्कि इसलिए कि जब भी जरुरत पड़े आपका दिमाग उन्हें निर्देश दे और आप जैसे चाहें उन्हें चला सकें, अगर ऐसा नहीं होगा तो आप हंसी के पात्र बन जायेंगे। लेकिन मुद्दा ये नहीं है मुद्दा गंभीर है कि आपके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण क्षमता आपके control से बाहर है। आपका मन जो हर समय अपनी बकवास कर रहा है, बल्कि वो नहीं कर रहा जो आप उस से करवाना चाहतें हैं। जैसे गलत खाना खाने से आपको दस्त लगना natural process है उसी तरह बुरे विचारों को ग्रहण करना भी मानव की प्रकृति के विरुद्ध है। यही कारण है कि अगर आपका मन आपके लिए हमेशा ही आपको खुश करने वाली चीज़ें सोचता तो आप इसे कभी न रोकना चाहते। स्वयं विचार कीजिये।

एक छोटा सा प्रयास जिस से कि हम अपने मन की बकबक को control  कर सकतें हैं,  Newsfellow  द्वारा किया गया है। आप सभी fellows से अनुरोध है कि नीचे comment सेक्शन में इस विषय पर अपने विचार भी भेजें, जिससे कि हम उन्हें अपने आने वाले Topics में शामिल कर सकें।

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