मिट्टी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में: शुभ दीपावली

Hello Fellows,

Newsfellow.com  की टीम की तरफ से आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। उम्मीद करतें हैं कि आप सभी दिवाली की तैयारी जोर-शोर से चल रही होगी। घर में सफाई करनी हो या साज-सज्जा का सामान खरीदना हो इन सबकी तैयारी परिवार का हर सदस्य बड़े चाव से करता है।

दीपावली का त्यौहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है जो कि 19 अक्तूबर 2017 है। अमावस्या की रात दीपों का यह त्यौहार अंधकार से प्रकाश की तरफ जाने की प्रेरणा देता है। हमेशा हर व्यक्ति की जय-जयकार अनेक प्रकार के दुखों और कष्टों से गुजरने के बाद ही होती है और संघर्ष ही जीवन है इस प्रकार का सन्देश भले ही भगवान को मानव शरीर में आने के बाद ही क्यों न देना पड़ा हो, सृष्टि की प्रेरणा बन सकने वाले हर प्रकार के जीवन आपको हमारे पुराणों और कथाओं में मिल जायेंगे।

दीपावली भगवान श्री राम, माता सीता, भ्राता लक्ष्मण के लंका विजय के बाद अयोध्या में सकुशल आने की ख़ुशी में मनाया जाता है। इस ख़ुशी में अयोध्यावासी अनेक प्रकार के भोज बनाकर और अपने घरों में दिये जलाकर इस त्यौहार को मनातें हैं और रामायण काल से ही इसे  खूब हर्षौल्लास के साथ मनाया जाने लगा।

दीपावली के दिन को माता लक्ष्मी के जन्मदिवस के रूप में भी माने जाता है, कहा जाता है कि इसी दिन क्षीर-सागर में समुद्र-मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी की उत्पत्ति हुई थी और तभी से ही माता लक्ष्मी के जन्मदिवस के रूप में इस पवित्र त्यौहार को माने जाने लगा।

मिट्टी के दिये जलाने की वैज्ञानिकता: 

वास्तव में दिये जलाने के कारण वायुमंडल में व्याप्त अनेकों अनेक कीटाणु, रोगाणुओं का नाश होता है, कीट पतंगे दिये की लौ के वशीभूत होकर अपने प्राणों का अंत कर देतें हैं और अपने समर्पण का भाव व्यक्त करतें हैं।

आनंद और समृद्धि के लिए लोग गाय के घी के दीपक, बुरे प्रभावों और अशुभ घटनाओं को टालने के कारण तिल के तेल के दिये, और वायुमंडल को पवित्र करने के लिए सरसों के तेल के दीपक जलातें हैं। सावन और भाद्रपद में उत्पन्न हुई बीमारियां दिवाली के बाद कम होने लगती हैं। (वायरल, डेंगू , मलेरिया आदि जो भी बीमारियाँ किसी वायरस या कीटों से फैलती है उनमे कमी होती है)

और सबसे बड़ी बात: अपने जीवन की परवाह किये बिना अपने प्रियतम के प्रति समर्पण का भाव हमें उस कीट/पतंगे से सीखना चाहिए जो प्रकाश की लौ को अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देता है और वह दीपक से सीखें कि कैसे स्वयं को तिल-तिल जलाकर दूसरों का मार्ग कैसे प्रशस्त किया जाता है।

दीपावली खुशियाँ बांटने का त्यौहार है इसलिए मेरे घर के आसपास या मौहल्ले में जो भी खुशियों से वंचित है उसके घर में भी खुशियों कारण हम बनने की कोशिश करें यही इस त्यौहार के मूल उद्देश्य होना चाहिए। कुछ पक्तियां हैं जिसमे छिपा सन्देश हम सभी समझें तो अच्छा होगा।

राष्ट्र हित का गला घोंट कर, छेद न करना थाली में

मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में

देश के धन को देश में रखना, नहीं बहाना नाली में।

मिट्टी वाले दिये जलाना, अबकी बार दीवाली में…..

बने जो अपनी मिटटी से वो दिये बिकें बाज़ारों में

छुपी है वैज्ञानिकता अपने सभी तीज त्योहारों में

चायनीज झालर से आकर्षित कीट पतंगे आतें हैं

जबकि दिये में जलकर बरसाती कीड़े मर जातें हैं

कार्तिक दीपदान से बदलें पितृ-दोष खुशहाली में

मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में ………

कार्तिक की अमावस वाली रात ना अबकी काली हो

दिए बनाने वालों की भी खुशियों भरी दिवाली हो

अपने देश का पैसा जाये अपने भाई की झोली में

गया जो दुश्मन देश में पैसा , लगेगा रायफल गोली में

देश की सीमा रहे सुरक्षित, चूक न हो रखवाली में

मिट्टी वाले दिए जलाना अबकी बार दिवाली में  ……

एक बार फिर से टीम Newsfellow.com की तरफ से आपको और आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं। यह त्यौहार आपके जीवन में अपार खुशियाँ लेकर आये।

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