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ये फायदे जानकर आप जरुर पीयेंगे तांबे के बर्तन में रखा जल/10 amazing health benefits of copper vessel water

वैसे तो पानी को किसी भी रूप में पीना अच्छा ही माना गया है। आप ये बात तो जानते ही हैं कि हमारे शरीर का 70% हिस्सा पानी से ही बना है, इसलिए हमारी कोशकीय संरचना को जीवंत रखने के लिए पानी अत्यंत आवश्यक है। आजकल स्वच्छ पानी हमें RO, UV और ना जाने कितनें तरीकों से प्राप्त होता है लेकिन जो तरीका आपको इस पोस्ट में बताया जा रहा है वो पुराना तो है, लेकिन सबसे effective भी है। आपको याद होगा जब भी आप अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ कहीं ऐसे स्थान पर गये होंगे जहाँ कोई नदी वगैरह आती होगी, तो उन्होंने आपको सिक्का फेंकने के लिए जरूर कहा होगा।


हमें आजतक तक लगता था कि शायद कोई पुण्य मिलता होगा या कोई wish पूरी करने के लिए ऐसा किया जाता है, ऐसा बिलकुल नहीं है।

वास्तव में पीने के पानी का मुख्य स्त्रोत नदियों को ही माना गया है और पुराने समय में तांबे के सिक्के ही प्रचलन में होते थे। तो कहीं न कहीं सिक्के नदियों में फेंकने का “वैज्ञानिक कारण” था। आइये आपको बतातें हैं कि आखिर वो क्या वजह थी जिसके चलते तांबे (copper) को इतना महत्व दिया जाता था।

  1. पानी को स्वच्छ करता है: तांबे का पात्र पानी में उपस्थित फंगस,शैवाल या बैक्टीरिया को खत्म करने में सहायक है। ऐसा करने के लिए पानी को ताम्रपात्र में पूरी रात रखना चाहिए और या फिर कम से कम 4-8 घंटे के बाद ही वह पानी पीना चाहिए। ऐसा करने से पानी पूरी तरह शुद्ध हो जाता है। और आप जानकर हैरान होंगे कि ताम्रजल कभी बासी नहीं होता और किसी भी प्रकार की सूजन को कम करता है और शरीर को toxin मुक्त करता है।
  2. Copper की कमी को दूर करने में सहायक: हमारा शरीर copper की उत्पादकता नहीं करता, और ऐसा करने के लिए हमें फल सब्जियों आदि पर निर्भर रहना पड़ता है। प्रतिदिन ताम्रजल पीने से न केवल कॉपर की कमी को दूर किया जा सकता है बल्कि घातक बीमारियाँ जैसे कैंसर, थायरायड आदि को भी दूर किया जा सकता है।
  3. पाचन तन्त्र को मजबूत करता है: आयुर्वेद के अनुसार यदि जल को 8 घंटे तक ताम्रपात्र में रखने के बाद ग्रहण किया जाये तो पाचन तंत्र मजबूत होता है। वर्तमान समय में दूषित और अनियमित खानपान से एसिडिटी, बदहजमी, अपच की समस्या आम है लेकिन, ताम्रजल को नियमित पीने से इन सब समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है। तांबे में ऐसे जीवाणु उपस्थित होतें है जो हमारे शरीर में बने विषाक्त पदार्थों को मल-मूत्र के माध्यम से बाहर निकालने में सहायक है।
  4. वजन घटाने में सहायक: यदि तमाम प्रयासों जैसे रेशेदार फल इत्यादि खाने से भी आपके वजन में कोई फर्क नहीं पड रहा तो आपको नियमित रूप से तांबे के बर्तन में रखा जल पीना चाहिए। ऐसा करने से शरीर की चर्बी धीरे-धीरे कम होने लगती है परिणामस्वरूप आपका वजन घटने लगता है।
  5. त्वचा के लिए लाभदायक: जैसा कि हमने पहले ही बताया कि तांबे में काफी प्रकार के Anti-toxin पाए जातें हैं। हर रोज रात को रखा 4 गिलास पानी सुबह खाली पेट पीने से त्वचा सम्बन्धी रोगों में अत्यंत लाभकारी है। ऐसा करने से आपकी त्वचा लम्बे समय तक जवान रहती है और Anti oxident की उपस्थिति होने के कारण झुर्रियां भी दूर होती है।
  6. गठिया में लाभदायक: शारीरिक तौर पर उम्र बढ़ने के साथ घुटनों, या जोड़ों सम्बन्धी दर्दें रहना स्वाभाविक है लेकिन, आजकल छोटी उम्र में भी ऐसी दिक्कतें आने लगी हैं। तांबे में उपस्थित Anti inflammatory गुणों के चलते ना केवल दर्द में आराम मिलता है बल्कि गठिया में विशेष रूप से लाभदायक माना गया है। ताम्रजल का सेवन करने से शरीर का यूरिक एसिड कम हो जाता है, जिससे गठिया और जोड़ों में सूजन की वजह से होने वाले दर्द में आराम मिलता है।
  7. थायरॉयड में लाभदायक: शरीर में थायरोक्सिन हार्मोन के असंतुलन के कारण हमारे शरीर का तेज़ी से वजन घटना-बढना, अधिक थकान महसूस करना इसके प्रमुख लक्षण है। मेडिकल साइंस के अनुसार ताम्रजल पीने से हमारे शरीर में थायरोक्सिन हार्मोन का संतुलन बना रहता है और यह थायरोयड ग्रंथि की कार्यप्रणाली को नियंत्रित करता है।
  8. खून की कमी को दूर करे: भारतीय महिलाओं में एनीमिया की समस्या बहुत सामान्य है और copper के विषय में ये तथ्य सबसे हैरान करने वाला है कि शरीर में होने वाली खून की कमी को ताम्रजल दूर करता है। यह शरीर के जरूरी पोषक तत्वों को अवशोषित कर रक्त वाहिकाओं में पहुंचता है और रक्त प्रवाह को भी नियंत्रित करता है।
  9. कैंसर को रोकने में सहायक: तांबे के पात्र में रखा जल वात, पित्त, कफ को दूर करने में तो लाभकारी है ही लेकिन, इसके साथ ही इसमें पाए जाने वाले anti oxident कैंसर से लड़ने की शक्ति प्रदान करतें हैं। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के अनुसार कैंसर की शुरुआत को रोकने में सहायक है।
  10. हार्ट अटैक को रखे दूर: वर्तमान समय में बहुत से लोग ऐसे हैं जो बढ़ते कोलेस्ट्रोल के चलते हार्ट अटैक का शिकार हो रहें हैं। प्रतिदिन 3-4 गिलास ताम्रजल पीने से दिल से जुडी किसी भी बीमारी को दूर रखा जा सकता है। जैसा की आप जान चुकें हैं anti oxidents की उपस्थिति के चलते यह रक्त प्रवाह को ठीक करता है और शरीर में बढ़े हुए कोलेस्ट्रोल को कम करता है ताकि ह्रदय तक आवश्यक रक्त का संचारण हो सके।

सावधानियां: कुछ सावधानियां हैं…. जो हमें तांबे के बर्तन का प्रयोग करते समय बरतनी चाहिए। भले ही सामान्य तौर पर कुछ ऐसा न होता हो लेकिन फिर भी कुछ बातें हमें ध्यान रखनी चाहिए। copper का oxigen के संपर्क में आने के कारण ओक्सीकरन(oxidization) होता रहता है जिसके कारण copper toxicity बढने लगती है, इससे बचने के लिए हमें समय-समय पर ताम्रपात्र को नीम्बू, आंवला, या इमली के रस से साफ़ करते रहना चाहिए, ऐसा करने से हमें ताम्रजल का पूरा लाभ मिल सकेगा। दूसरी बात जो हमे ध्यान रखनी है कि 3-4 गिलास ताम्रजल हमारे शरीर की copper की आवश्यकता को पूरा करने में पर्याप्त है, इसलिए अधिकता किसी भी चीज़ की हो लाभदायक नहीं हो सकती।

आपको हमारा ये article कैसा लगा, कृप्या हमें बताएं। अगर आप भी सोने से महंगे ताम्रजल के किसी और प्रयोग को जानते हैं तो comment box में शेयर जरूर करें।

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