मोम कीड़ा (wax worm) बना ग्लोबल प्रदूषण संकट में “बेहद रोमांचक”

पूरे विश्व के सामने plastic bags का consumption एक चुनौती बनता जा रहा है। समय-समय पर सरकारों ने इसे use न करने के फरमान तो जारी किये लेकिन पूर्ण रूप से लागू करने में असफलता का ही सामना करना पड़ा। Plastic bags का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव नदियों,सागरों,वनस्पति पर पड़ रहा है। कोई भी स्थान जहाँ plastic को dump किया जाता है वहां धरती में पानी का रिसाव रुक जाता है। महासागरों में पॉलिथीन से होने वाले प्रदूषण कि मात्रा सबसे अधिक है। Ellen MacArthur Foundation द्वारा एक Study के अनुसार अगर इसी तरह से चलता रहा तो 2050 तक महासागरों में मछलियों से ज्यादा वजन plastic का हो जायेगा। आज के समय में इसे खतरे की घंटी मान कर चलें तो बेहतर होगा और हम अपने आने वाली पीढ़ी को एक बेहतर भविष्य दे पाएंगे।

(Pic Source: www.bodyunburdened.com)

Plastic को खतरनाक बनाती है उसकी chemical संरचना अर्थात Plastic के compounds को तोड़कर उसे environment friendly नहीं बनाया जा सकता। इस संकट से बचने का तरीका हो सकतें हैं Wax-Worms! जो मधुमक्खियों के छत्तों में पाए जातें हैं। आम भाषा में इसे पतंगे का लारवा भी कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है कि ये Caterpillar के लारवा plastic को Consume कर सकते हैं, यदि Industrial level पर इनका प्रयोग किया जाये तो पर्यावरण को बचाने में मोम-कीट का विशेष योगदान हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इन कीटों के saliva(लार) में बेहद शक्तिशाली Enzymes पाए गये हैं जिसकी वजह से ही ये कीट मधुमक्खियों के छत्तों में पाए जाने वाले मोम को digest कर पातें हैं। Waxworms कि इस क्षमता का तब पता चला जब एक Biologist और मधुमक्खी पालक Federica Bertocchini अपने Beehives को साफ़ कर रही थी और उन्होंने संयोगवश कुछ छत्तों को plastic shopping bags पर रख दिया। कुछ समय बाद जब उन्होंने नोटिस किया कि polythene bags में छेद हो गये हैं। इस बात को साबित करने के लिए कि कहीं ये कोई eating machanism तो नहीं जो plastic को consume करने के लिए responsible है, इसलिए शोधकर्ताओं ने कुछ Worms को mash किया और polythene bags पर फैला दिया और उन्हें वही Results प्राप्त हुए। Paolo Bombelli from Cambridge University के अनुसार “यह अत्यंत रोमांचक है क्यूंकि plastic compounds को break करना आजतक बेहद challenging था।“ यदि एक रासायनिक एंजाइम इस रासायनिक प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार है, तो Biotechnological तरीकों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर इसका प्रयोग किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि एक दिन इस technique का प्रयोग करके इन enzymes को directly spray किया जा सकेगा या समुद्री पौधों में infuse कर plastic से होने वाले pollution से वातावरण को बचाया जा सकता है

                              The waxworm makes short work of the polyethylene plastic Credit: Paolo Bombelli/SWNS   Source:www.telegraph.co.uk

Polyethylene नाम का plastic विश्वभर में plastic bags या packaging के लिए इस्तेमाल होता है। cambridge यूनिवर्सिटी में किये गये एक शोध के अनुसार एक supermarket से plastic bags पर 100 WaxWorms को छोड़ा गया और पाया की 40 minutes के बाद ही उस पर छेद दिखायी देने लगे। और 12 घंटे के बाद 92mg plastic consume हो चुका था। जबकि इसके विपरीत, वैज्ञानिक विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया के द्वारा 24 घंटे में 0.13mg consume करने में ही सफलता प्राप्त कर सके थे।

Cambridge Researchers ने Institute of Biomedicine and Biotechnology of Cantabria (CSIC) में spectroscopic analysis यह जानने के लिए किया कि WaxWorms, plastic को किन checmical bonds में तोडतें हैं की जिससे wax(मोम) तक को पचाया जा सकता है। तो उन्होंने पाया कि ये छोटे परजीवीयों ने polythylene को ethylene glycol (unbonded substance) नामक पदार्थ में बदल दिया।

शुरुआत अच्छी है परन्तु, बड़ी बात यह है कि न जाने इस शोध को होने में कितना समय लगेगा और हो सकता है कि situation तब तक और गंभीर हो जाये। इसलिए आप सभी से अनुरोध है कि Plastic bags का use करने से बचें और ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसके बारे में बताएं। अपने आसपास के नदियों, सागरों को स्वच्छ रखने में योगदान दें। तो आएई आज प्रण लें कि मैं plastic bags का प्रयोग कम से कम करूंगा और अपने वातावरण को साफ-सुथरा बनाने में सहयोगी बनूंगा यही देश की सेवा में उठाया गया पहला कदम होगा।

 

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