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इसरो की नयी उपलब्धि/GSLV Mk III rocket: All you need to know

ISRO ने सोमवार को भारत के सबसे बड़े रॉकेट GSLV MK III  -D1 का सफल प्रक्षेपण “सतीश धवन स्पेस सेंटर” श्रीहरिकोटा से किया और इसे “बाहुबली” और “Obedient boy” का नाम दिया इसरो ने अपने पहले विकास उड़ान पर देश के सबसे बड़े उपग्रह वाहन GST-19 का शुभारम्भ किया ।

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन के space Application के Director तपन मिश्रा ने कहा कि “इसरो ने बाहुबली को जन्म दिया है और हमें इस बात पर गर्व है”। इसके अलावा पी.वी. वेंकटकृष्णन (Director of propulsion complex) ने ISRO  के इस कदम को “Game Changer” के रूप में परिभाषित किया और कहा कि हार्डवेयर के मामले में यह एक लम्बी छलांग है।  उन्होंने बताया कि इसमें अधिक से अधिक स्वदेशी घटकों का इस्तेमाल किया गया है और कम से कम हार्डवेयर बाहर का है। बाहुबली से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि क्षमता और पेलोड क्षमता के मामले में यह एक विशाल वाहन है। वैज्ञानिक इस उत्कृष्ट कृति को किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहें हैं। क्रायोजेनिक इंजन डेवलपमेंट में शामिल वैज्ञानिकों ने कहा कि इस तकनीक ने वर्तमान velocity को 56% तक बढ़ा दिया है और उपग्रह को कुल 37000 किलोमीटर/घंटा की speed देकर GTO (Geosynchronous Transfer orbit) में स्थापित किया है ।

सोर्स: Wikipedia

सोमवार को इस सफलता के साथ भारत ने जटिल और उच्च प्रदर्शन cryogenic technique में महारत हासिल कर ली है और कुछ देशो के एक ऐसे विशिष्ट ग्रुप में शामिल हो गये हैं जो इस तकनीक के महारथी हैं। भारत में अब तक का यह सबसे ज्यादा वजन के उपग्रह ढोने वाला एकमात्र वाहन बन चुका है। आपको बता दें,  200 हाथियों के बराबर वजन को उठाने में सक्षम यह राकेट 4000KG GTO(Geosynchronous Transfer orbit) में और 10000KG lower earth orbit में पेलोड को स्थापित कर सकता है ।

 

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