अमेरिका का “यंग साइंटिस्ट अवार्ड” 11 साल की गीतांजलि राव के नाम: “Geetanjali rao” winner of “Young Scientist Award”

credit: andy-king-discovery-education

पानी में लेड मतलब सीसा प्रदूषण का पता लगाने का टेस्ट काफी महंगा होता था लेकिन भारतीय मूल की 11 वर्ष गीतांजलि राव ने इस प्रदूषण का पता लगाने का सस्ता तरीका विकसित करके अमेरिका के “यंग साइंटिस्ट अवार्ड” को अपने नाम करके भारत का नाम रौशन किया है।

गीतांजलि को उन 10 विद्यार्थियों में से चुना गया है जिन्हें अपने विचार विकसित करने के लिए दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों के साथ 3 महीने  तक साथ रहने का मौका मिला था। गीतांजलि ने जो device बनाया है वह कार्बन-नैनोट्यूब्स के जरिये पानी में होने वाले लेड/सीसा प्रदूषण का पता लगाता है।

कहाँ से मिली प्रेरणा?

अमेरिका में हजारों जल स्त्रोत सीसा प्रदूषण का शिकार है। गीतांजलि ने बताया उनकी यह खोज मिशिगन प्रान्त के फ्लिंट शहर में 2014-2015 में फैले जल प्रदूषण से प्रेरित है जिसमे कई अधिकारियों पर लोगों की जान लेने के आपराधिक मुकद्दमे भी चल रहें हैं। उन्होंने बताया कि जिस नदी का जल सीसे से प्रदूषित है वह पीने या नहाने योग्य नहीं होता और अब तक उसे टेस्ट करने के लिए लैब में भेजना पड़ता था और टेस्ट महंगा होने वजह से खर्चा बहुत अधिक आता था। लेकिन गीतांजलि द्वारा जो device बनाया गया है उसे कहीं भी ले जाया जा सकता है और मोबाइल एप से जोड़कर पानी के नमूनों की जाँच की जा सकती है। ग्रीक भाषा में शुद्ध  जल की देवी को “टेथीज” नाम से जाना जाता है और उसी देवी के नाम पर इस device का नाम रखा गया है।

andy-king-3M-young-scientist-challenge

बिज़नस इनसाइडर में दिए गये एक इंटरव्यू के दौरान गीतांजलि ने बताया की अपने इस उपकरण को और बेहतर बनाने के लिए वह इस पर और काम करना चाहती है। आगे उन्होंने बताया कि यदि कोई सीसा युक्त पानी में नहाता है तो उसके बदन पर चकत्ते हो जातें हैं जिसे कोई भी त्वचा रोग विशेषज्ञ आसानी से बता सकता है।

गीतांजलि को अवार्ड के साथ 25 हजार डॉलर यानि लगभग 16 लाख रूपये की राशि भी दी गयी है।(सोर्स: बीबीसी हिंदी, बिज़नस इनसाइडर)

दोस्तों! आपको हमारी यह पोस्ट कैसी लगी? कमेंट बॉक्स में कमेंट के माध्यम से या हमें hellonewsfellow@gmail.com पर ईमेल करके जरुर बताएं।

 

1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*